अन्वयः
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सप्तभिः दिव्यायां त्रिस्रोतसि कृताभिषेकैः परं ब्रह्म गृणद्भिः ब्रह्मर्षिभिः (ते) उपतस्थिरे ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
कृतेति॥ किंच, दिवि भवायां दिव्यायां त्रिस्रोतस्याकाशगङ्गायां कृताभिषेकैः कृतावगाहैः। परं ब्रह्म वेदरहस्यं गृणद्भिः पठद्भिः सप्तभिर्ब्रह्मर्षिभिः कश्यपप्रभृतिभिरुपतस्थिर उपासांचक्रिरे ॥
Summary
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The seven celestial sages, having performed their sacred ablutions in the divine triple-streamed Ganges and chanting the supreme Brahman, waited upon the queens.
सारांश
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दिव्य आकाशगंगा में स्नान कर चुके सातों ब्रह्मर्षियों ने परब्रह्म की स्तुति करते हुए उनकी उपासना की।
पदच्छेदः
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| कृताभिषेकैः | कृ–अभिषेक (३.३) | by those who had performed their ablutions |
| दिव्यायाम् | दिव्य (७.१) | in the divine |
| त्रिस्रोतसि | त्रि–स्रोतस् (७.१) | in the three-streamed river (Ganges) |
| च | च | and |
| सप्तभिः | सप्तन् (३.३) | by the seven |
| ब्रह्मर्षिभिः | ब्रह्मन्–ऋषि (३.३) | by the Brahman-sages |
| परम् | पर (२.१) | the supreme |
| ब्रह्म | ब्रह्मन् (२.१) | Brahman |
| गृणद्भिः | गृणत् (√गृ+शतृ, ३.३) | by those chanting |
| उपतस्थिरे | उपतस्थिरे (उप√स्था कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | were waited upon |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कृ | ता | भि | षे | कै | र्दि | व्या | यां |
| त्रि | स्रो | त | सि | च | स | प्त | भिः |
| ब्र | ह्म | र्षि | भिः | प | रं | ब्र | ह्म |
| गृ | ण | द्भि | रु | प | त | स्थि | रे |
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