विभक्तात्मा विभुस्तासामेकः कुक्षिष्वनेकधा ।
उवास प्रतिमाचन्द्रः प्रसन्नानामपामिव ॥

अन्वयः AI विभुः एकः (अपि) विभक्तात्मा (सन्) प्रसन्नानाम् अपां प्रतिमाचन्द्रः इव तासां कुक्षिषु अनेकधा उवास ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) विभक्तेति॥ एक एकरूपो विभुर्विष्णुस्तासां राजपत्नीनां कुक्षिषु गर्भेषु। प्रसन्नानां निर्मलानामपां कुक्षिषु प्रतिमाचन्द्रः प्रतिबिम्बचन्द्र इव। अनेकधा विभक्तात्मा सन्। उवास ॥
Summary AI The omnipresent Lord, though one, divided Himself and resided in the wombs of the queens in multiple forms, just as the reflection of the moon appears in many clear waters.
सारांश AI अविनाशी भगवान ने स्वयं को विभाजित कर उन रानियों के गर्भ में वैसे ही निवास किया, जैसे स्वच्छ जल के पात्रों में चंद्रमा की अनेक प्रतिमाएं दिखाई देती हैं।
पदच्छेदः AI
विभक्तात्माविविभक्त (√भज्+क्त)आत्मन् (१.१) with a divided self
विभुःविभु (१.१) the omnipresent Lord
तासाम्तद् (६.३) of them
एकःएक (१.१) one
कुक्षिषुकुक्षि (७.३) in the wombs
अनेकधाअनेकधा in many ways
उवासउवास (√वस् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) resided
प्रतिमाचन्द्रःप्रतिमाचन्द्र (१.१) the reflected moon
प्रसन्नानाम्प्रप्रसन्न (√सद्+क्त, ६.३) of the clear
अपाम्अप् (६.३) waters
इवइव like
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
वि क्ता त्मा वि भु स्ता सा
मे कः कु क्षि ष्व ने धा
वा प्र ति मा न्द्रः
प्र न्ना ना पा मि
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