अन्वयः
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तस्य अभिरामेण वपुषा चोदितः गुरुः जगत्प्रथममङ्गलं रामः इति नामधेयं चक्रे ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
राम इति॥ अभिरमन्तेऽत्रेत्यभिरामं मनोहरम्। अधिकरणार्थे घञ्प्रत्ययः। तेन वपुषा चोदितः प्रेरितो गुरुः पिता दशरथस्तस्य पुत्रस्य जगतां प्रथमं मङ्गलं सुलक्षणं राम इति नामधेयं चक्रे। अभिरामत्वमेव रामशब्दप्रवृत्तिनिमित्तमित्यर्थः ॥
Summary
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Prompted by the child's charming body, the preceptor Vasiṣṭha gave him the name 'Rāma', which is the foremost auspicious blessing for the world.
सारांश
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बालक के अत्यंत मनोहर शरीर को देखकर कुलगुरु ने उनका नाम 'राम' रखा, जो संसार का सबसे पहला मंगलकारी नाम सिद्ध हुआ।
पदच्छेदः
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| रामः | राम (√रम्+घञ्, १.१) | Rama |
| इति | इति | thus |
| अभिरामेण | अभि–अभिराम (√रम्+घञ्, ३.१) | by the charming |
| वपुषा | वपुस् (३.१) | by the body |
| तस्य | तद् (६.१) | his |
| चोदितः | चोदित (√चुद्+क्त, १.१) | prompted |
| नामधेयम् | नामधेय (२.१) | name |
| गुरुः | गुरु (१.१) | the preceptor |
| चक्रे | चक्रे (√कृ कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | made |
| जगत्प्रथममङ्गलम् | जगत्–प्रथम–मङ्गल (२.१) | the foremost auspicious thing for the world |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| रा | म | इ | त्य | भि | रा | मे | ण |
| व | पु | षा | त | स्य | चो | दि | तः |
| ना | म | धे | यं | गु | रु | श्च | क्रे |
| ज | ग | त्प्र | थ | म | म | ङ्ग | लम् |
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