अन्वयः
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तद्क्षणम् दशाननकिरीटेभ्यः राक्षसश्रियः अश्रुबिन्दवः मणिव्याजेन पृथिव्याम् पर्यस्ताः ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
दशाननेति॥ तत्क्षणं तस्मिन्क्षणे रामोत्पत्तिसमये राक्षसश्रियोऽश्रुबिन्दवो दशाननकिरीटेभ्यो मणीनां व्याजेन मिषेण पृथिव्यां पर्यस्ताः पतिताः। रामोदये सति तद्वध्यस्य रावणस्य किरीटमणिभ्रंशलक्षणं दुर्निमित्तमभूदित्यर्थः ॥
Summary
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At that very moment, the gems falling from the crowns of Rāvaṇa onto the earth appeared to be the teardrops of the Royal Fortune of the demons, foreboding their coming destruction.
सारांश
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उसी क्षण रावण के मुकुटों से मणियाँ गिरने लगीं, जो ऐसी प्रतीत हुईं मानो राक्षसों की राजलक्ष्मी के आँसू पृथ्वी पर गिर रहे हों।
पदच्छेदः
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| दशाननकिरीटेभ्यः | दश–आनन–किरीट (५.३) | from the crowns of the ten-faced one |
| तत्क्षणम् | तद्–क्षण (२.१) | at that very moment |
| राक्षसश्रियः | राक्षस–श्री (६.१) | of the fortune of the demons |
| मणिव्याजेन | मणि–व्याज (३.१) | under the pretext of gems |
| पर्यस्ताः | पर्यस्त (परि√अस्+क्त, १.३) | fell down |
| पृथिव्याम् | पृथिवी (७.१) | on the earth |
| अश्रुबिन्दवः | अश्रु–बिन्दु (१.३) | teardrops |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| द | शा | न | न | कि | री | टे | भ्य |
| स्त | त्क्ष | णं | रा | क्ष | स | श्रि | यः |
| म | णि | व्या | जे | न | प | र्य | स्ताः |
| पृ | थि | व्या | म | श्रु | बि | न्द | वः |
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