अन्वयः
AI
तेषाम् स्वाभाविकम् विनीतत्वम् विनयकर्मणा मुमूर्च्छ हविषा हविर्भुजाम् सहजम् तेजः इव ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
स्वाभाविकमिति॥ तेषां कुमाराणां संबन्धि स्वाभाविकं सहजं विनीतत्वं विनयकर्मणा शिक्षया। हविर्भुजामग्नीनां सहजं तेजो हविषाऽऽज्यादिकेनेव। मुमूर्छ ववृधे। निसर्गसंस्काराभ्यां विनीता इत्यर्थः ॥
Summary
AI
Their natural modesty increased through disciplined training, just as the innate brilliance of fire increases when fed with sacrificial oblations.
सारांश
AI
शिक्षा और संस्कारों से उनकी स्वाभाविक विनम्रता और सहज तेज उसी प्रकार बढ़ गया, जैसे घी की आहुति पाकर अग्नि और अधिक प्रज्वलित हो उठती है।
पदच्छेदः
AI
| स्वाभाविकम् | स्वभाव–ठक् (१.१) | natural |
| विनीतत्वम् | विनीत–त्व (१.१) | modesty |
| तेषाम् | तद् (६.३) | their |
| विनयकर्मणा | विनय–कर्मन् (३.१) | by the training in discipline |
| मुमूर्च्छ | मुमूर्च्छ (√मूर्छ् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | increased |
| सहजम् | सह–सहज (√जन्+ड, १.१) | innate |
| तेजः | तेजस् (१.१) | brilliance |
| हविषा | हविस् (३.१) | by the oblation |
| इव | इव | like |
| हविर्भुजाम् | हविस्–भुज् (६.३) | of the fires |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स्वा | भा | वि | कं | वि | नी | त | त्वं |
| ते | षां | वि | न | य | क | र्म | णा |
| मु | मू | र्च्छ | स | ह | जं | ते | जो |
| ह | वि | षे | व | ह | वि | र्भु | जाम् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.