श्रियः पद्मनिषण्णायाःऋ क्षौमान्तरितमेखले ।
अङ्के निक्षिप्तचरणमास्तीर्णकरपल्लवे ॥

अन्वयः AI पद्म-निषण्णायाः श्रियः क्षौम-अन्तरित-मेखले आस्तीर्ण-कर-पल्लवे अङ्के निक्षिप्त-चरणम् (तम् ददृशुः) ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) श्रिय इति॥ कीदृशं विष्णुम्? पद्मे निषण्णाया उपविष्टायाः श्रियः क्षौमन्तरिता दुकूलव्यवहिता मेखला यस्य तस्मिन्। आस्तीर्णौ करपल्लवौ वाणिपल्लवौ यस्मिन्। विशेषणद्वयेनापि चरणयोः सौकुमार्यात्कटिमेखलास्पर्शासहत्वं सूच्यते। तस्मिन्नङ्के निक्षिप्तौ चरणौ येन तम् ॥
Summary AI They saw him with his foot placed on the lap of Shri (Lakshmi), who was seated on a lotus. Her lap, where her girdle was covered by a silken garment, was spread with her sprout-like hands.
सारांश AI भगवान के चरण कमल पर बैठी लक्ष्मी जी की गोद में रखे थे, जिनके रेशमी वस्त्र और कोमल हाथों के स्पर्श से चरणों की शोभा बढ़ रही थी।
पदच्छेदः AI
श्रियःश्री (६.१) of Shri (Lakshmi)
पद्मनिषण्णायाःपद्मनिषण्ण (नि√सद्+क्त, ६.१) who was seated on a lotus
क्षौमान्तरितमेखलेक्षौमअन्तरितमेखला (७.१) on which the girdle was covered by a silk garment
अङ्केअङ्क (७.१) on the lap
निक्षिप्तचरणम्निक्षिप्त (नि√क्षिप्+क्त)चरण (२.१) he who had placed his foot
आस्तीर्णकरपल्लवेआस्तीर्ण (आ√स्तॄ+क्त)करपल्लव (७.१) on which her sprout-like hands were spread
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
श्रि यः द्म नि ण्णा याः
क्षौ मा न्त रि मे ले
ङ्के नि क्षि प्त
मा स्ती र्ण ल्ल वे
About

Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.