अन्वयः
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समाने सौभ्रात्रे अपि यथा उभौ रामलक्ष्मणौ तथा भरतशत्रुघ्नौ प्रीत्या द्वन्द्वम् बभूवतुः हि ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
समान इति॥ शोभनाः स्निग्धा भ्रातरो येषां ते सुभ्रातरः।
नद्यृतश्च (अष्टाध्यायी ५.४.१५३ ) इति कब्न भवति। वन्दिते भ्रातुः इति निषेधात्। तेषां भावः सौभ्रात्रम्। यवादित्वादण्। तस्मिन्समाने चतुर्णां तुल्येऽपि यथौभौ रामलक्ष्मणौ प्रीत्या द्वन्द्वं बभूवतुः। तथा भरतशत्रुघ्नौ प्रीत्या द्वन्द्वं द्वौ द्वौ साहचर्येणाभिव्यक्तौ बभूवतुः। द्वन्द्वं रहस्यमर्यादावचनव्युत्क्रमणयज्ञपात्रप्रयोगाभिव्यक्तिषु (अष्टाध्यायी ८.१.१५ ) इत्यभिव्यक्तार्थे निपातः। क्वचित्कस्यचित्स्नेहो नातिरिच्यत इति भावः ॥
Summary
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Even though brotherly affection was equal among all, Rāma and Lakṣmaṇa formed one inseparable pair, while Bharata and Śatrughna formed another, bound by special mutual love.
सारांश
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यद्यपि चारों भाइयों में समान भ्रातृत्व भाव था, फिर भी राम-लक्ष्मण और भरत-शत्रुघ्न की जोड़ियाँ आपसी विशेष प्रेम के कारण प्रसिद्ध हुईं।
पदच्छेदः
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| समाने | समान (७.१) | in equal |
| अपि | अपि | even |
| हि | हि | indeed |
| सौभ्रात्रे | सुभ्रातृ–अण् (७.१) | brotherly affection |
| यथा | यथा | just as |
| उभौ | उभ (१.२) | both |
| रामलक्ष्मणौ | राम–लक्ष्मण (१.२) | Rāma and Lakṣmaṇa |
| तथा | तथा | similarly |
| भरतशत्रुघ्नौ | भरत–शत्रुघ्न (१.२) | Bharata and Śatrughna |
| प्रीत्या | प्रीति (३.१) | with love |
| द्वन्द्वम् | द्वन्द्व (१.१) | a pair |
| बभूवतुः | बभूवतुः (√भू कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. द्वि.) | became |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | मा | ने | ऽपि | हि | सौ | भ्रा | त्रे |
| य | थो | भौ | रा | म | ल | क्ष्म | णौ |
| त | था | भ | र | त | श | त्रु | घ्नौ |
| प्री | त्या | द्व | न्द्वं | ब | भू | व | तुः |
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