तौ सरांसि रसवद्भिरम्बुभिः
कूजितैः श्रुतिसुखैः पतत्रिणः ।
वायवः सुरभिपुष्परेणुभि-
श्छायया च जलदाः सिषेविरे ॥
तौ सरांसि रसवद्भिरम्बुभिः
कूजितैः श्रुतिसुखैः पतत्रिणः ।
वायवः सुरभिपुष्परेणुभि-
श्छायया च जलदाः सिषेविरे ॥
कूजितैः श्रुतिसुखैः पतत्रिणः ।
वायवः सुरभिपुष्परेणुभि-
श्छायया च जलदाः सिषेविरे ॥
अन्वयः
AI
तौ सरांसि रसवद्भिरम्बुभिः, पतत्रिणः श्रुतिसुखैः कूजितैः, वायवः सुरभिपुष्परेणुभिः, जलदाः च छायया सिषेविरे ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
ताविति॥ तौ राघवौ कर्मभूतौ सरांसि कर्तॄणि रसवद्भिर्मधुरैरम्बुभिः सिषेविरे। पतत्रिणः पक्षिणः। सुखयन्तीति सुखानि। पचाद्यच्। श्रुतीनां सुखानि। तैः कूजितैः। वायवः सुरभिपुष्परेणुभिः जलदाश्छायया च। सिषेविरे इति सर्वत्र संबध्यते ॥
Summary
AI
The lakes served the two brothers with sweet water, the birds with ear-pleasing warbling, the winds with fragrant flower pollen, and the clouds with their shade.
सारांश
AI
सरोवरों ने मधुर जल से, पक्षियों ने कलरव से, सुगन्धित पवन ने पराग से और मेघों ने अपनी शीतल छाया से उन दोनों की सेवा की।
पदच्छेदः
AI
| तौ | तद् (२.२) | those two |
| सरांसि | सरस् (१.३) | lakes |
| रसवद्भिः | रस (+वतुप्, ३.३) | tasty/sweet |
| अम्बुभिः | अम्बु (३.३) | with waters |
| कूजितैः | कूजित (√कूज्+क्त, ३.३) | with warblings |
| श्रुतिसुखैः | श्रुति–सुख (३.३) | pleasant to the ears |
| पतत्रिणः | पतत्त्र (+इनि, १.३) | birds |
| वायवः | वायु (१.३) | winds |
| सुरभिपुष्परेणुभिः | सुरभि–पुष्प–रेणु (३.३) | with fragrant flower pollen |
| छायया | छाया (३.१) | with shade |
| च | च | and |
| जलदाः | जल–द (√दा+क, १.३) | clouds |
| सिषेविरे | सिषेविरे (√सेव् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | served/attended upon |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तौ | स | रां | सि | र | स | व | द्भि | र | म्बु | भिः |
| कू | जि | तैः | श्रु | ति | सु | खैः | प | त | त्रि | णः |
| वा | य | वः | सु | र | भि | पु | ष्प | रे | णु | भि |
| श्छा | य | या | च | ज | ल | दाः | सि | षे | वि | रे |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.