कृच्छ्रलब्धमपि लब्धवर्णभा-
क्यं दिदेश मुनये सलक्ष्मणम् ।
अप्यसुप्रणयिनां रघोः कुले
न व्यहन्यत कदाचिदर्थिता ॥
कृच्छ्रलब्धमपि लब्धवर्णभा-
क्यं दिदेश मुनये सलक्ष्मणम् ।
अप्यसुप्रणयिनां रघोः कुले
न व्यहन्यत कदाचिदर्थिता ॥
क्यं दिदेश मुनये सलक्ष्मणम् ।
अप्यसुप्रणयिनां रघोः कुले
न व्यहन्यत कदाचिदर्थिता ॥
अन्वयः
AI
लब्धवर्णभाक् सः कृच्छ्रलब्धम् अपि सलक्ष्मणम् मुनये दिदेश । रघोः कुले अर्थिता असुप्रणयिनाम् अपि कदाचित् न व्यहन्यत ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
कृच्छ्रलब्धमिति॥ लब्धा वर्णाः प्रसिद्धयो यैस्ते लब्धवर्णा विचक्षणाः।
सब्धवर्णो विचक्षणः इत्यमरः (अमरकोशः २.७.६ ) । तान्भजत इति लब्ध्वर्णभाक्। विद्वत्सेवीत्यर्थथः। स राजा कृच्छ्रलब्धमपि सलक्ष्मणं तं रामं मुनये दिदेशातिसृष्टवान्। तथा हि-असुप्रणयिनां प्राणार्थिनामप्यर्थिता याञ्चा रघोः कुले कदाचिदपि न व्यहन्यत न विहता। न विफलीकृतेत्यर्थः। यैरर्भिभ्यः प्राणा अपि समर्प्यन्ते तेषां पुत्रादित्यागो न विस्मयावह इति भावः ॥
Summary
AI
The learned King Daśaratha gave Rāma, along with Lakṣmaṇa, to the sage, even though they were obtained with great difficulty. In the lineage of Raghu, a request is never refused, even if the seekers ask for life itself.
सारांश
AI
राजा दशरथ ने अत्यंत कठिनाई से प्राप्त अपने दोनों पुत्रों को मुनि को सौंप दिया, क्योंकि रघुवंश में याचकों की प्रार्थना कभी विफल नहीं होती।
पदच्छेदः
AI
| कृच्छ्रलब्धम् | कृच्छ्र–लब्ध (√लभ्+क्त, २.१) | obtained with great difficulty |
| अपि | अपि | even |
| लब्धवर्णभाक् | लब्ध–वर्ण–भज् (१.१) | the learned king (Daśaratha) |
| दिदेश | दिदेश (√दिश् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | gave/assigned |
| मुनये | मुनि (४.१) | to the sage |
| सलक्ष्मणम् | स–लक्ष्मण (२.१) | along with Lakṣmaṇa |
| अपि | अपि | even |
| असुप्रणयिनाम् | असु–प्रणयिन् (६.३) | of those who ask for life itself |
| रघोः | रघु (६.१) | of Raghu |
| कुले | कुल (७.१) | in the lineage |
| न | न | not |
| व्यहन्यत | व्यहन्यत (वि√हन् भावकर्मणोः लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was struck down/refused |
| कदाचित् | कदाचित् | ever |
| अर्थिता | अर्थिता (√अर्थ्+तल्, १.१) | the request |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कृ | च्छ्र | ल | ब्ध | म | पि | ल | ब्ध | व | र्ण | भा |
| क्यं | दि | दे | श | मु | न | ये | स | ल | क्ष्म | णम् |
| अ | प्य | सु | प्र | ण | यि | नां | र | घोः | कु | ले |
| न | व्य | ह | न्य | त | क | दा | चि | द | र्थि | ता |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.