अन्वयः
AI
गताध्वभिः तैः सायम् शिवेषु आश्रमतरुषु वसतिः अगृह्यत येषु दीर्घतपसः परिग्रहः वासवक्षणकलत्रताम् ययौ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तैरिति॥ गताध्वभिस्तैस्त्रिभिः सायं शिवेषु रम्येष्वाश्रमतरुषु वसतिः स्थआनमगृह्यत। येष्वाश्रमतरुषु दीर्घतपसो गौतमस्य परिग्रहः पत्नी।
पत्नीपरिजनादानमूलशापाः परिग्रहाः इत्यमरः (अमरकोशः ३.३.२५२ ) । अहल्येति यावत्। वासवस्येन्द्रस्य क्षणकलत्रतां ययौ ॥
Summary
AI
In the evening, the travelers took rest under the auspicious trees of the hermitage where the wife of the ascetic Gautama had once briefly become the consort of Indra.
सारांश
AI
मार्ग में उन्होंने उन आश्रमों के वृक्षों के नीचे विश्राम किया, जहाँ तपस्वी गौतम की पत्नी अहल्या ने इंद्र का क्षणिक सान्निध्य प्राप्त किया था।
पदच्छेदः
AI
| तैः | तद् (३.३) | by them |
| शिवेषु | शिव (७.३) | in auspicious |
| वसतिः | वसति (१.१) | stay |
| गताध्वभिः | गत–अध्वन् (३.३) | who had completed the day's journey |
| सायम् | सायम् | in the evening |
| आश्रमतरुषु | आश्रम–तरु (७.३) | under the hermitage trees |
| अगृह्यत | अगृह्यत (√ग्रह् भावकर्मणोः लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was taken |
| येषु | यद् (७.३) | under which |
| दीर्घतपसः | दीर्घ–तपस् (६.१) | of the long-penanced one (Gautama) |
| परिग्रहः | परिग्रह (१.१) | wife (Ahalyā) |
| वासवक्षणकलत्रताम् | वासव–क्षण–कलत्र–ता (२.१) | the state of being Indra's wife for a moment |
| ययौ | ययौ (√या कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | went (attained) |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तैः | शि | वे | षु | व | स | ति | र्ग | ता | ध्व | भिः |
| सा | य | मा | श्र | म | त | रु | ष्व | गृ | ह्य | त |
| ये | षु | दी | र्घ | त | प | सः | प | रि | ग्र | हो |
| वा | स | व | क्ष | ण | क | ल | त्र | तां | य | यौ |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.