अन्वयः
AI
समये स्थितौ वरुणवासवोपमौ तौ उभौ भूपती समेत्य स्वप्रभावसदृशीं कन्यकातनयकौतुकक्रियां वितेनतुः ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
ताविति॥ समये स्थितावाचारनिष्ठौ ।
समयाः शपथाचारकालसिद्धान्तसंविदः इत्यमरः (अमरकोशः ३.३.१५७ ) । वरुणवासवावुपमोपमानं ययोस्तौ तथोक्तौ। तावुभौ भूपती जनक-दशरथौ समेत्य। स्वप्रभावसदृशीमात्ममहिमानुरूपां कन्यकानां सीतादीनां तनयानां रामादीनां च कौतुकक्रियां विवाहोत्सवं वितेनतुर्विस्तृतवन्तौ। तनोतेर्लिट् ॥
Summary
AI
The two kings, Daśaratha and Janaka, who resembled Indra and Varuṇa and were steadfast in their duties, met and performed the marriage ceremonies for their daughters and sons with a grandeur that matched their immense power.
सारांश
AI
इंद्र और वरुण के समान प्रतापी उन दोनों राजाओं ने अपनी मर्यादा के अनुरूप अपने पुत्रों और पुत्रियों के विवाह का उत्सव अत्यंत वैभव और उल्लास के साथ संपन्न किया।
पदच्छेदः
AI
| तौ | तद् (१.२) | those two |
| समेत्य | समेत्य (सम्+आ√इ+ल्यप्) | having met |
| समये | समय (७.१) | in the custom/agreement |
| स्थितौ | स्थित (√स्था+क्त, १.२) | firmly established |
| उभौ | उभ (१.२) | both |
| भूपती | भू–पति (१.२) | kings |
| वरुणवासवोपमौ | वरुण–वासव–उपम (१.२) | resembling Varuṇa and Indra |
| कन्यकातनयकौतुकक्रियाम् | कन्यका–तनय–कौतुक–क्रिया (२.१) | the marriage rites of the daughters and sons |
| स्वप्रभावसदृशीम् | स्व–प्रभाव–सदृश (२.१) | befitting their own power |
| वितेनतुः | वितेनतुः (वि√तन् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. द्वि.) | performed/extended |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तौ | स | मे | त्य | स | म | ये | स्थि | ता | वु | भौ |
| भू | प | ती | व | रु | ण | वा | स | वो | प | मौ |
| क | न्य | का | त | न | य | कौ | तु | क | क्रि | यां |
| स्व | प्र | भा | व | स | दृ | शीं | वि | ते | न | तुः |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.