तेजसः सपदि राशिरुत्थइ-
तः प्रादुरास किल वाहिनीमुखे ।
यः प्रमृज्य नयनानि सैनिकै-
र्लक्षणीयपुरुषाकृतिश्चिरात् ॥

अन्वयः AI सपदि वाहिनीमुखे तेजसः राशिः उत्थितः प्रादुरास किल यः सैनिकैः नयनानि प्रमृज्य चिरात् लक्षणीयपुरुषाकृतिः ॥
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) तेजसा इति॥ सपद्युत्थितस्तेजसो राशिर्वाहिनीमुखे सेनाग्रे प्रादुरास किल खलु। यः सैनिकैर्नयनानि प्रमृज्य चिराल्लक्षणीया भावनीया पुरुषाकृतिर्यस्य स तथोक्तः । अभूदिति शेषः ॥
Summary AI Suddenly, a mass of light appeared at the front of the army. After rubbing their eyes, the soldiers could finally discern a human form within that radiance after a long time.
सारांश AI अचानक सेना के सामने तेज का एक पुंज प्रकट हुआ। सैनिकों ने अपनी आँखें मल-मलकर देखा, तब कहीं जाकर बहुत देर बाद उन्हें उस तेज में एक पुरुष की आकृति दिखाई दी।
पदच्छेदः AI
सपदिसपदि instantly
वाहिनीमुखेवाहिनीमुख (७.१) at the front of the army
तेजसःतेजस् (६.१) of light
राशिःराशि (१.१) a mass
उत्थितःउत्थित (उद्√स्था+क्त, १.१) risen
प्रादुरासप्रादुरास (प्रादुर्√अस् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) appeared
किलकिल indeed
यःयद् (१.१) which
सैनिकैःसैनिक (३.३) by the soldiers
नयनानिनयन (२.३) eyes
प्रमृज्यप्रमृज्य (प्र√मृज्+ल्यप्) having rubbed
चिरात्चिर (५.१) after a long time
लक्षणीयपुरुषाकृतिःलक्षणीय (√लक्ष्+अनीयर्)पुरुषआकृति (१.१) having a human form that could be discerned
छन्दः रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२
ते सः दि रा शि रु त्थ
तः प्रा दु रा कि वा हि नी मु खे
यः प्र मृ ज्य ना नि सै नि कै
र्ल क्ष णी पु रु षा कृ ति श्चि रात्
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