न प्रहर्तुमलमस्मि निर्दयं
विप्र इत्यभिभवत्यपि त्वयि ।
शंस किं गतिमनेन पत्रिणा
हन्मि लोकमुत ते मखार्जितम् ॥
न प्रहर्तुमलमस्मि निर्दयं
विप्र इत्यभिभवत्यपि त्वयि ।
शंस किं गतिमनेन पत्रिणा
हन्मि लोकमुत ते मखार्जितम् ॥
विप्र इत्यभिभवत्यपि त्वयि ।
शंस किं गतिमनेन पत्रिणा
हन्मि लोकमुत ते मखार्जितम् ॥
अन्वयः
AI
त्वयि अभिभवति अपि, (त्वम्) विप्रः इति (हेतोः) निर्दयम् प्रहर्तुम् अलम् न अस्मि । शंस, अनेन पत्रिणा किम् ते गतिम् हन्मि उत मखार्जितम् लोकम् (हन्मि) ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
नेति॥ अभिभवत्यपि त्वयि। विप्र इति हेतोः। निर्दयं प्रहर्तुमलं शक्तो नास्मि। किं त्वनेन पत्रिणा शरेण ते गतिं गमनं हन्मि, उत मखार्जितं लोकं स्वर्गं हन्मि शंस ब्रूहि ॥
Summary
AI
Rama said, "Even though you assail me, I am not able to strike you mercilessly, because you are a Brahmin. Tell me, with this arrow, shall I destroy your power of movement, or the heavenly realms you have earned through sacrifices?"
सारांश
AI
राम बोले कि आपके तिरस्कार करने पर भी मैं ब्राह्मण होने के नाते आप पर प्रहार नहीं करूँगा। बताइए, मैं इस बाण से आपकी गति रोकूँ या आपके यज्ञों द्वारा अर्जित लोकों को नष्ट करूँ?
पदच्छेदः
AI
| न | न | not |
| प्रहर्तुम् | प्रहर्तुम् (प्र√हृ+तुमुन्) | to strike |
| अलम् | अलम् | able |
| अस्मि | अस्मि (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I am |
| निर्दयम् | निर्दयम् | mercilessly |
| विप्रः | विप्र (१.१) | a Brahmin |
| इति | इति | because |
| अभिभवति | अभिभवत् (अभि√भू+शतृ, ७.१) | even though you are assailing |
| अपि | अपि | even though |
| त्वयि | युष्मद् (७.१) | you |
| शंस | शंस (√शंस कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | tell (me) |
| किम् | किम् | whether |
| गतिम् | गति (२.१) | the power of movement |
| अनेन | इदम् (३.१) | with this |
| पत्रिणा | पत्रिन् (३.१) | with this feathered one (arrow) |
| हन्मि | हन्मि (√हन् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | shall I destroy |
| लोकम् | लोक (२.१) | the realm |
| उत | उत | or |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| मखार्जितम् | मख–अर्जित (२.१) | earned through sacrifices |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | प्र | ह | र्तु | म | ल | म | स्मि | नि | र्द | यं |
| वि | प्र | इ | त्य | भि | भ | व | त्य | पि | त्व | यि |
| शं | स | किं | ग | ति | म | ने | न | प | त्रि | णा |
| ह | न्मि | लो | क | मु | त | ते | म | खा | र्जि | तम् |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.