अन्वयः
AI
सः भ्रात्रा तथा इति उक्त्वा विसृष्टः पुरीम् न एव अविशत् नन्दिग्रामगतः तस्य राज्यम् न्यासम् इव अभुनक् ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
स इति॥ स भरतो भ्रात्रा रामेण तथेत्युक्त्वा विसृष्टः सन् पुरीमयोध्यां नाविशदेव। किंतु नन्दिग्रामगतः सन्। तस्य रामस्य राज्यं न्यासमिव निक्षेपमिव। अभुनगपालयत्। न तूपभुक्तवानित्यर्थः। अन्यथा
भुजोऽनवने (अष्टाध्यायी १.३.६३ ) इत्यात्मनेपदप्रसङ्गात्। भुजेर्लङ् ॥
Summary
AI
Dismissed by his brother Rama with the words 'so be it,' Bharata did not enter the capital city. Instead, staying in Nandigrama, he protected the kingdom as if it were a sacred trust belonging to Rama.
सारांश
AI
राम की आज्ञा से भरत लौटे, किंतु नगर में प्रवेश न कर नन्दिग्राम में ही रहे और राज्य का शासन एक धरोहर की तरह किया।
पदच्छेदः
AI
| सः | तद् (१.१) | He |
| विसृष्टः | विसृष्ट (वि√सृज्+क्त, १.१) | given leave |
| तथा | तथा | so be it |
| इति | इति | thus |
| उक्त्वा | उक्त्वा (√वच्+क्त्वा) | having said |
| भ्रात्रा | भ्रातृ (३.१) | by his brother |
| न | न | not |
| एव | एव | indeed |
| अविशत् | अविशत् (√विश् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | he entered |
| पुरीम् | पुरि (२.१) | the city |
| नन्दिग्रामगतः | नन्दिग्राम–गत (१.१) | having gone to Nandigrama |
| तस्य | तद् (६.१) | his |
| राज्यं | राज्य (२.१) | kingdom |
| न्यासम् | न्यास (२.१) | a trust |
| इव | इव | like |
| अभुनक् | अभुनक् (√भुज् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | he protected |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | वि | सृ | ष्ट | स्त | थे | त्यु | क्त्वा |
| भ्रा | त्रा | नै | वा | वि | श | त्पु | रीम् |
| न | न्दि | ग्रा | म | ग | त | स्त | स्य |
| रा | ज्यं | न्या | स | मि | वा | भु | नक् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.