अन्वयः
AI
सा अनसूया-अतिसृष्टेन पुण्य-गन्धेन अङ्गरागेण काननम् पुष्पोञ्चलित-षट्पदम् चकार ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अनसूयेति॥ सा सीताऽनसूययाऽत्रिभार्यया। अतिसृष्टेन दत्तेन पुण्यगन्धेनाङअगरागेण काननं वनं पुष्पेभ्य उञअचलिता निर्गताः षट्पदा यस्मिंस्तत्तथाभूतं चकार ॥
Summary
AI
With the fragrant body-ointment bestowed upon her by Anasuya, she caused the bees in the forest to rise up from the flowers (attracted by her scent).
सारांश
AI
अनसूया द्वारा दिए गए पवित्र और सुगंधित अंगराग को लगाकर सीता जी ने वन के भँवरों को अपनी ओर आकर्षित कर लिया।
पदच्छेदः
AI
| अनसूयातिसृष्टेन | अनसूया–अतिसृष्ट (३.१) | given by Anasuya |
| पुण्यगन्धेन | पुण्य–गन्ध (३.१) | with a holy fragrance |
| काननम् | कानन (२.१) | the forest |
| सा | तद् (१.१) | she |
| चकार | चकार (√कृ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | made |
| अङ्गरागेण | अङ्ग–राग (३.१) | with the unguent |
| पुष्पोञ्चलितषट्पदम् | पुष्प–उञ्चलित–षट्पद (२.१) | with bees stirred up from the flowers |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | न | सू | या | ति | सृ | ष्टे | न |
| पु | ण्य | ग | न्धे | न | का | न | नम् |
| सा | च | का | रा | ङ्ग | रा | गे | ण |
| पु | ष्पो | ञ्च | लि | त | ष | ट्प | दम् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.