स जहार तयोर्मध्ये मैथिलीं लोकशोषणः ।
नभोनभस्ययोर्वृष्टिमवग्रह इवान्तरे ॥

अन्वयः AI लोक-शोषणः सः तयोः मध्ये मैथिलीं जहार नभोनभस्ययोः अन्तरे वृष्टिम् अवग्रहः इव ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) स इति॥ लोकस्य शोषणः शोषकः स राक्षसस्तयो रामलक्ष्मणमयोर्मध्ये मैधिलीम्। नभो-नभस्ययोः श्रावण-भाद्रपदयोरन्तरे मधअये वृष्टिमवग्रहो वर्षप्रतिबंध इव। जहार। वृष्टिर्वर्षं तद्विघातेऽवग्राहावग्रहौ समौ इत्यमरः (अमरकोशः १.३.१३ )
Summary AI That tormentor of the world seized Sita from between the two brothers, just as a drought stops the rain between the months of Shravana and Bhadrapada.
सारांश AI लोक को कष्ट देने वाले उस राक्षस ने दोनों भाइयों के बीच से मैथिली का हरण कर लिया, जैसे अकाल वर्षा ऋतु के दो महीनों के बीच बाधा डालता है।
पदच्छेदः AI
सःतद् (१.१) he
जहारजहार (√हृ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) seized
तयोःतद् (६.२) of the two
मध्येमध्य between
मैथिलीम्मैथिली (२.१) Maithili
लोकशोषणःलोकशोषण (१.१) the tormentor of the world
नभोनभस्ययोःनभस्नभस्य (६.२) of the months Shravana and Bhadrapada
वृष्टिम्वृष्टि (२.१) the rain
अवग्रहःअवग्रह (१.१) a drought
इवइव like
अन्तरेअन्तर between
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
हा यो र्म ध्ये
मै थि लीं लो शो णः
भो स्य यो र्वृ ष्टि
ग्र वा न्त रे
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