अन्वयः
AI
सा सीतासंनिधौ एव कथितान्वया तं वव्रे हि नारीणाम् अत्यारूढः मनोभवः अकालज्ञः ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
सेति॥ सा शूर्पणखा सीतासंनिधावेव कथितान्वया कथितस्ववंशा सती तं रामं वव्रे वृतवती। तथा हि-अत्यारूढोऽतिप्रवृद्धो नारीणां मनोभवः कामः कालज्ञोऽवसरज्ञो न भवतीत्यकालज्ञो हि ॥
Summary
AI
In the very presence of Sita, she declared her lineage and chose Rama as her husband. Indeed, when love in women becomes excessive, it loses all sense of propriety and timing.
सारांश
AI
अपना परिचय देकर उसने सीता जी की उपस्थिति में ही श्री राम का वरण किया, क्योंकि स्त्रियों का तीव्र कामवेग उचित समय का ज्ञान नहीं रखता।
पदच्छेदः
AI
| सा | तद् (१.१) | she |
| सीतासंनिधौ | सीता–संनिधि (७.१) | in the presence of Sita |
| एव | एव | itself |
| तम् | तद् (२.१) | him |
| वव्रे | वव्रे (√वृ कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | chose |
| कथितान्वया | कथित–अन्वया (१.१) | having stated her lineage |
| अत्यारूढः | अति–आरूढ (१.१) | overwhelming |
| हि | हि | indeed |
| नारीणाम् | नारी (६.३) | of women |
| अकालज्ञः | अ–काल–ज्ञ (१.१) | ignorant of proper time |
| मनोभवः | मनस्–भव (१.१) | love (desire) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सा | सी | ता | सं | नि | धा | वे | व |
| तं | व | व्रे | क | थि | ता | न्व | या |
| अ | त्या | रू | ढो | हि | ना | री | णा |
| म | का | ल | ज्ञो | म | नो | भ | वः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.