अन्वयः
AI
वृषस्कन्धः रामः इति वृषस्यन्तीं ताम् शशास, "बाले! अहम् कलत्रवान् मे कनीयांसं भजस्व ।"
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
कलत्रवानिति॥ वृषः पुमान्।
वृषः स्याद्वासवे धर्मे सौरभेये च शुक्रले। पुंराशिमेदयोः शृङ्ग्यां मूषकश्रेष्ठयोरपि॥ इति विश्वः। वृषं पुरुषमात्मार्थमिच्छतीति वृषस्यन्ती कामुकी। वृषस्यन्ती तु कामुकी इत्यमरः (अमरकोशः २.६.९ ) । सुप आत्मनः क्यच् (अष्टाध्यायी ३.१.८ ) इति क्यच्प्रत्ययः। अश्वक्षीरवृषलवणानामात्मप्रीतौ क्यचि (अष्टाध्यायी ७.१.५१ ) इत्यसुगागमः। ततो लटः शत्रादेशः। उगितशअच (अष्टाध्यायी ४.१.६ ) इति ङीप्। श्लोकार्थस्तु-वृषस्कन्धो रामो वृषस्तन्तीं तां राक्षसीम् हे बाले! अहं कलत्रवान्, मे कनीयांसं कनिष्ठं भजस्वइति शशासाः ज्ञापितवान् ॥
Summary
AI
The bull-shouldered Rama instructed the lustful woman, saying, 'O girl, I already have a wife. You should approach my younger brother instead.'
सारांश
AI
बैल के समान शक्तिशाली कंधों वाले श्री राम ने उस कामुक स्त्री को अपने छोटे भाई के पास जाने का सुझाव देते हुए बताया कि वे स्वयं पत्नी के साथ हैं।
पदच्छेदः
AI
| कलत्रवान् | कलत्रवत् (१.१) | a married man |
| अहम् | अस्मद् (१.१) | I |
| बाले | बाला (८.१) | O girl |
| कनीयांसम् | कनीयस् (२.१) | younger brother |
| भजस्व | भजस्व (√भज् कर्तरि लोट् (आत्मने.) म.पु. एक.) | choose |
| मे | अस्मद् (६.१) | my |
| इति | इति | thus |
| रामः | राम (१.१) | Rama |
| वृषस्यन्तीम् | वृषस्यन्ती (√वृषस्य+शतृ+ङीप्, २.१) | her who was filled with passion |
| वृषस्कन्धः | वृष–स्कन्ध (१.१) | the bull-shouldered |
| शशास | शशास (√शास् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | instructed |
| ताम् | तद् (२.१) | her |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | ल | त्र | वा | न | हं | बा | ले |
| क | नी | यां | सं | भ | ज | स्व | मे |
| इ | ति | रा | मो | वृ | ष | स्य | न्तीं |
| वृ | ष | स्क | न्धः | श | शा | स | ताम् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.