अन्वयः
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तेन अपि ज्येष्ठाभिगमनात् पूर्वम् अनभिनन्दिता सा भूयो रामाश्रया अभूत् उभयकूलभाक् नदी इव ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
ज्येष्ठेति॥ पूर्वं ज्येष्ठाभिगमनात्तेन लक्ष्मणेनाष्यनभिनन्दिता नाङअगीकृता भूयो रामाश्रया सा राक्षसी। उभे कूले भजतीत्युभयकूलभाक् नदीवाभूत् सा हि यातायाताभ्यां पर्यायेण कूलद्वयगामिनी नदीसदृश्यभूदित्यर्थः ॥
Summary
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Rejected by Lakshmana as well because she had first approached his elder brother, she returned to Rama, moving between the two like a river that touches both its banks.
सारांश
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लक्ष्मण द्वारा भी अस्वीकार किए जाने पर, वह पुनः राम के पास उसी प्रकार लौट आई जैसे कोई नदी अपने दोनों तटों के बीच भटकती है।
पदच्छेदः
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| ज्येष्ठाभिगमनात् | ज्येष्ठ–अभिगमन (५.१) | from approaching the elder |
| पूर्वम् | पूर्वम् | before |
| तेन | तद् (३.१) | by him |
| अपि | अपि | also |
| अनभिनन्दिता | अन्–अभिनन्दित (१.१) | not welcomed |
| सा | तद् (१.१) | she |
| अभूत् | अभूत् (√भू कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | became |
| रामाश्रया | राम–आश्रया (१.१) | one who took refuge in Rama |
| भूयः | भूयस् | again |
| नदी | नदी (१.१) | a river |
| इव | इव | like |
| उभयकूलभाक् | उभय–कूल–भाज् (१.१) | touching both banks |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ज्ये | ष्ठा | भि | ग | म | ना | त्पू | र्वं |
| ते | ना | प्य | न | भि | न | न्दि | ताम् |
| सा | ऽभू | द्रा | मा | श्र | या | भू | यो |
| न | दी | वो | भ | य | कू | ल | भाक् |
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