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उदायुधानापततस्तान्दृप्तान्प्रेक्ष्य राघवः ।
निदधे विजयाशंसां चापे सीतां च लक्ष्मणे ॥

अन्वयः AI राघवः उदायुधान् आपततः तान् दृप्तान् प्रेक्ष्य विजयाशंसां चापे सीतां च लक्ष्मणे निदधे ॥
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) उदिति॥ उदायुधानुद्यतायुधानापतत आगच्छतो दृप्तांस्तान्खरादीन्प्रेक्ष्य राघवश्चापे विजयस्याशंसामाशां लक्ष्मणे सीतां च निदधे। सीतारक्षणे लक्ष्मणं नियुज्य स्वयं युद्धाय संनद्ध इति भावः ॥
Summary AI Seeing the arrogant demons rushing forward with raised weapons, Rama placed his hope of victory in his bow and entrusted the protection of Sita to Lakshmana.
सारांश AI शस्त्र उठाए हुए आते हुए उन घमंडी राक्षसों को देखकर राम ने विजय का भरोसा अपने धनुष पर और सीता की रक्षा का भार लक्ष्मण पर सौंप दिया।
पदच्छेदः AI
राघवःराघव (१.१) Raghava (Rama)
उदाय्धान्उद्आयुध (२.३) with raised weapons
आपततःआपतत् (आ√पत्+शतृ, २.३) rushing towards
तान्तद् (२.३) them
दृप्तान्दृप्त (√दृप्+क्त, २.३) arrogant
प्रेक्ष्यप्रेक्ष्य (प्र√ईक्ष्+ल्यप्) having seen
विजयाशंसाम्विजयआशंसा (२.१) hope for victory
चापेचाप (७.१) in the bow
सीताम्सीता (२.१) Sita
and
लक्ष्मणेलक्ष्मण (७.१) in Lakshmana
निदधेनिदधे (नि√धा कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) placed
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
दा यु धा ना
स्ता न्दृ प्ता न्प्रे क्ष्य रा वः
नि धे वि या शं सां
चा पे सी तां क्ष्म णे
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