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असज्जनेन काकुत्स्थः प्रयुक्तमथ दूषणम् ।
न चक्षमे शुभाचारः स दूषणमिवात्मनः ॥

अन्वयः AI अथ शुभाचारः सः काकुत्स्थः असज्जनेन प्रयुक्तं दूषणं आत्मनः दूषणं इव न चक्षमे ॥
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) असदिति॥ अथ शुभाचारो रणे साधुचारि सद्वृत्तश्च स काकुत्स्थोऽसज्जनेन दुर्जनेन रक्षोजनेन च प्रयुक्तं प्रेषितमुञ्चारितं च दूषणं दूषणाख्यं राक्षसमात्मनो दूषणं दोषमिव न चक्षमे न सेहे। प्रतिकर्तुं प्रवृत्त इत्यर्थः॥
Summary AI Then Rama, who was of righteous conduct, did not tolerate the demon Dushana sent by the wicked, just as he would not tolerate a stain upon his own character.
सारांश AI सदाचारी राम ने दुष्टों द्वारा भेजे गए दूषण नामक राक्षस को उसी प्रकार सहन नहीं किया, जैसे कोई अपने चरित्र पर लगे कलंक को सहन नहीं करता।
पदच्छेदः AI
असज्जनेनअसज्जन (३.१) by the wicked one
काकुत्स्थःकाकुत्स्थ (१.१) Kakutstha (Rama)
प्रयुक्तम्प्रयुक्त (प्र√युज्+क्त, २.१) sent
अथअथ then
दूषणम्दूषण (२.१) Dushana (the demon)
not
चक्षमेचक्षमे (√क्षम् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) did tolerate
शुभाचारःशुभआचार (१.१) one of virtuous conduct
सःतद् (१.१) he
दूषणम्दूषण (२.१) a blemish
इवइव like
आत्मनःआत्मन् (६.१) of oneself
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
ज्ज ने का कु त्स्थः
प्र यु क्त दू णम्
क्ष मे शु भा चा रः
दू मि वा त्म नः
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