अन्वयः
AI
सा सुर-द्विषां वरूथिनी बाण-वर्षिणं रामं योधयित्वा गृध्र-छाये अप्रबोधाय सुष्वाप ॥
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
सेति॥ सा सुरद्विषां वरूथिनी सेना बाणवर्षिणं रामं योधयित्वा युद्धं कारयित्वा गृध्राणां छाया गृध्रच्छायम्।
छाया बाहुल्ये (अष्टाध्यायी २.४.२२ ) इति क्लीबत्वम्। तस्मिन्। अप्रबोधायापुनर्बोधाय सुष्वाप। ममारेत्यर्थः। अत्र सुरतश्रान्तकान्तासमाधिर्धअवन्यते ॥
Summary
AI
That army of the enemies of the gods, after fighting against Rama who showered them with arrows, finally slept the eternal sleep (death) in the shade cast by the hovering vultures.
सारांश
AI
बाणों की वर्षा करने वाले राम से युद्ध कर वह राक्षसी सेना गीधों की छाया में ऐसी सोई कि फिर कभी नहीं जागी।
पदच्छेदः
AI
| सा | तद् (१.१) | that |
| बाणवर्षिणम् | बाण–वर्षिन् (२.१) | who was showering arrows |
| रामम् | राम (२.१) | Rama |
| योधयित्वा | योधयित्वा (√युध्+णिच्+क्त्वा) | having fought |
| सुरद्विषाम् | सुर–द्विष् (६.३) | of the enemies of gods |
| अप्रबोधाय | अप्रबोध (४.१) | never to awaken |
| सुष्वाप | सुष्वाप (√स्वप् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | slept |
| गृध्रच्छाये | गृध्र–छाया (७.१) | in the shadow of vultures |
| वरूथिनी | वरूथिनी (१.१) | army |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सा | बा | ण | व | र्षि | णं | रा | मं |
| यो | ध | यि | त्वा | सु | र | द्वि | षाम् |
| अ | प्र | बो | धा | य | सु | ष्वा | प |
| गृ | ध्र | च्छा | ये | व | रू | थि | नी |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.