अन्वयः
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राघवास्त्रविदीर्णानां तेषां रक्षसां प्रति एका शूर्पणखा एव दुष्प्रवृत्तिहरा अभवत् ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
राघवेति॥ एका शूर्पवन्नखानि यस्याः सा शूर्पणखा।
पूर्वपदात्संज्ञायाम्- (अष्टाध्यायी ८.४.३ ) इति णत्वम्। नखमुखात्संज्ञायाम्इति ङीप्प्रतिषेधः। सैव रावणं प्रति राघवास्त्रैर्विदीर्णानां हतानां तेषां रक्षसां खरीदीनां दुष्प्रवृत्तिं वार्तां हरति प्रापयतीति दुष्प्रवृत्तिहराऽभवत्। हरतेरनुद्यमनेऽच् (अष्टाध्यायी ३.२.९ ) इत्यच्प्रत्ययः ॥
Summary
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Among the demons who were being slaughtered by Rama's weapons, Shurpanakha alone became the messenger of the disastrous news to Ravana.
सारांश
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राम के अस्त्रों से छिन्न-भिन्न हुए उन राक्षसों का समाचार रावण तक पहुँचाने के लिए केवल अकेली शूर्पणखा ही शेष बची रही।
पदच्छेदः
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| राघवास्त्रविदीर्णानाम् | राघव–अस्त्र–विदीर्ण (६.३) | of those torn apart by Raghava's missiles |
| रावणम् | रावण (२.१) | to Ravana |
| प्रति | प्रति | towards |
| रक्षसाम् | रक्षस् (६.३) | of the demons |
| तेषाम् | तद् (६.३) | their |
| शूर्पणखा | शूर्पणखा (१.१) | Shurpanakha |
| एव | एव | alone |
| एका | एक (१.१) | only |
| दुष्प्रवृत्तिहरा | दुस्–प्रवृत्ति–हरा (१.१) | the bearer of bad news |
| अभवत् | अभवत् (√भू कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | became |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| रा | घ | वा | स्त्र | वि | दी | र्णा | नां |
| रा | व | णं | प्र | ति | र | क्ष | साम् |
| ते | षां | शू | र्प | ण | खै | वै | का |
| दु | ष्प्र | वृ | त्ति | ह | रा | ऽभ | वत् |
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