अन्वयः
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सः मृगरूपेण रक्षसा राघवौ वञ्चयित्वा पक्षीन्द्रप्रयासक्षणविघ्नितः सीतां जहार ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
रक्षसेति॥ स रावणो मृगरूपेण रक्षसा मारीचेन राघवौ वञ्चयित्वा प्रतार्य पक्षीन्द्रस्य जटायुषः प्रयासेन युद्धरूपेण क्षणं विघ्नितः संजातविघ्नः सन् सीता जहार ॥
Summary
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Having deceived the two Raghava brothers through a demon in the form of a deer, Ravana abducted Sita, though he was momentarily delayed by the valiant efforts of Jatayu, the king of birds.
सारांश
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मृग रूपी राक्षस के माध्यम से राम-लक्ष्मण को ठगकर, रावण ने जटायु द्वारा क्षण भर के लिए रोके जाने के बाद सीता का हरण कर लिया।
पदच्छेदः
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| रक्षसा | रक्षस् (३.१) | by a demon |
| मृगरूपेण | मृग–रूप (३.१) | in the form of a deer |
| वञ्चयित्वा | वञ्चयित्वा (√वञ्च्+णिच्+क्त्वा) | having deceived |
| सः | तद् (१.१) | he (Ravana) |
| राघवौ | राघव (२.२) | the two Raghavas |
| जहार | जहार (√हृ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | abducted |
| सीताम् | सीता (२.१) | Sita |
| पक्षीन्द्रप्रयासक्षणविघ्नितः | पक्षिन्–इन्द्र–प्रयास–क्षण–विघ्नित (१.१) | his effort momentarily obstructed by the king of birds |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| र | क्ष | सा | मृ | ग | रू | पे | ण |
| व | ञ्च | यि | त्वा | स | रा | ग | वौ |
| ज | हा | र | सी | तां | प | क्षी | न्द्र |
| प्र | या | स | क्ष | ण | वि | घ्नि | तः |
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