तयोस्तस्मिन्नवीभूतपितृव्यापत्तिशोकयोः ।
पितरीवाग्निसंस्कारात्परा ववृतिरे क्रियाः ॥

अन्वयः AI नवीभूतपितृव्यापत्तिशोकयोः तयोः तस्मिन् पितरि इव अग्निसंस्कारात् पराः क्रियाः ववृतिरे ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) तयोरिति॥ व्यापत्तिर्मरणम्। नवीभूतः पितृव्यापत्तिशोको ययोस्तौ तयो राघवयोस्तस्मिन्गृध्रे पितरीवाग्निसंस्कारादग्निसंस्कारमारभ्य परा उत्तराः क्रिया ववृतिरेऽवर्तन्त। तस्य पितृवदौर्ध्वदेहिकं चक्रतुरित्यर्थः ॥
Summary AI For the two brothers, whose grief over their father's death was renewed by this loss, the subsequent funeral rites for Jatayu were performed as if they were for their own father.
सारांश AI पिता की मृत्यु का शोक पुनः ताजा हो जाने पर उन दोनों ने जटायु का अंतिम संस्कार पिता के समान ही पूर्ण श्रद्धा से संपन्न किया।
पदच्छेदः AI
तयोःतद् (६.२) of the two of them
तस्मिन्तद् (७.१) for him (Jatayu)
नवीभूतपितृव्यापत्तिशोकयोःनवीभूतपितृव्यापत्तिशोक (६.२) for whom the grief of their father's death was renewed
पितरिपितृ (७.१) for a father
इवइव like
अग्निसंस्कारात्अग्निसंस्कार (५.१) beyond the cremation
पराःपर (१.३) subsequent
ववृतिरेववृतिरे (√वृत् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) proceeded
क्रियाःक्रिया (१.३) rites
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
यो स्त स्मि न्न वी भू
पि तृ व्या त्ति शो योः
पि री वा ग्नि सं स्का रा
त्प रा वृ ति रे क्रि याः
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