अन्वयः
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वधनिर्धूतशापस्य कबन्धस्य उपदेशतः समानव्यसने हरौ रामस्य सख्यं मुमूर्च्छ ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
वधेति॥ वधेन रामकृतेन निर्धूतशापस्य देवभूयं गतस्य कबन्धस्य रक्षोविशेषस्योपदेशतो रामस्य समानव्यसने समानापदि। सखअयार्थिनीत्यर्थः। हरौ कपौ सुग्रीवे।
शुकाहिकपिभेकेषु हरिर्ना कपिले त्रिषु इत्यमरः (अमरकोशः ३.३.१८३ ) । सख्यं मुमूर्च्छ ववृधे ॥
Summary
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On the advice of Kabandha, whose curse was ended by his death at Rama's hands, a friendship blossomed between Rama and the monkey king Sugriva, as both were suffering from similar misfortunes.
सारांश
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शापमुक्त हुए कबंध के परामर्श से, राम की मित्रता अपने समान ही विपत्ति में पड़े वानरराज सुग्रीव से अत्यंत प्रगाढ़ हो गई।
पदच्छेदः
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| वधनिर्धूतशापस्य | वध–निर्धूत–शाप (६.१) | of him whose curse was removed by his death |
| कबन्धस्य | कबन्ध (६.१) | of Kabandha |
| उपदेशतः | उपदेशतस् | from the advice |
| मुमूर्च्छ | मुमूर्च्छ (√मूर्छ् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | grew strong |
| सख्यम् | सख्य (१.१) | friendship |
| रामस्य | राम (६.१) | of Rama |
| समानव्यसने | समान–व्यसन (७.१) | who was in a similar misfortune |
| हरौ | हरि (७.१) | with the monkey (Sugriva) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| व | ध | नि | र्धू | त | शा | प | स्य |
| क | ब | न्ध | स्यो | प | दे | श | तः |
| मु | मू | र्च्छ | स | ख्यं | रा | म | स्य |
| स | मा | न | व्य | स | ने | ह | रौ |
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