अन्वयः
AI
तयोः एकेन रामं चतुर्दश समाः प्राव्राजयत् द्वितीयेन सुतस्य वैधव्यैकफलां श्रियम् ऐच्छत् ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तयोरिति॥ सा तयोर्वरयोर्मध्य एकेन वरेण रामं चतुर्दश समाः संवत्सरान्। अत्यन्तसंयोगे द्वितीया। प्राव्राजयत् प्रावासयत्। द्वितीयेन वरेण सुतस्य भरतस्य वैधव्यैकफलां स्ववैधव्यमात्रफलाम्। न तूपभोगफलामिति भावः। श्रियमैच्छदियेष ॥
Summary
AI
With the first boon, she exiled Rama to the forest for fourteen years. With the second, she sought the kingdom for her son Bharata—a sovereignty that would inevitably result in her own widowhood, as the shock would kill the King.
सारांश
AI
उन वरदानों में से एक के द्वारा उसने राम को चौदह वर्षों के लिए वन भेज दिया और दूसरे से अपने पुत्र के लिए वह राज्यलक्ष्मी चाही जिसका अंतिम फल उसका वैधव्य ही था।
पदच्छेदः
AI
| तयोः | तद् (६.२) | Of those two |
| चतुर्दश | चतुर्दशन् (२.३) | fourteen |
| एकेन | एक (३.१) | with one |
| रामं | राम (२.१) | Rama |
| प्राव्राजयत् | प्राव्राजयत् (प्र√व्रज् +णिच् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | she exiled |
| समाः | समा (२.३) | years |
| द्वितीयेन | द्वितीय (३.१) | with the second |
| सुतस्य | सुत (६.१) | for her son |
| ऐच्छत् | ऐच्छत् (√इष् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | she wished for |
| वैधव्यैकफलां | वैधव्य–एक–फल (२.१) | which had widowhood as its only fruit |
| श्रियम् | श्री (२.१) | the royal fortune |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | यो | श्च | तु | र्द | शै | के | न |
| रा | मं | प्रा | व्रा | ज | य | त्स | माः |
| द्वि | ती | ये | न | सु | त | स्यै | च्छ |
| द्वै | ध | व्यै | क | फ | लां | श्रि | यम् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.