अन्वयः
AI
कपिः तस्यै भर्तुः अभिज्ञानम् अङ्गुलीयं ददौ । तत् आनन्दाश्रुबिन्दुभिः अनुष्णैः प्रत्युद्गतम् इव ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तस्या इति॥ कपिर्हनुमान् भर्तू रामस्य संबन्ध्यभिज्ञानं प्रत्यभिज्ञानसाधकमङ्गुलीयमूर्मकाम्।
अङ्गुलीयकमूर्मिका इत्यमरः (अमरकोशः २.६.१०८ ) । जिह्वामूलाङ्गुलेश्छः (अष्टाध्यायी ४.३.६२ ) इति छप्रत्ययः। तस्यै जानक्यै ददौ। किंविधमङ्गुलीयम्? अनुष्णैः शीतलैस्तस्या आनन्दाश्रुबिन्दुभिः प्रत्युद्गतमिव स्थितम्। भर्त्रभिज्ञानदर्शनादानन्दबाष्पो जात इत्यर्थः ॥
Summary
AI
The monkey Hanuman gave her the husband's signet ring as a token of recognition. It was as if the ring was welcomed by her cool tears of joy.
सारांश
AI
हनुमान ने सीता को उनके पति राम की पहचान स्वरूप अंगूठी भेंट की, जिसे उन्होंने हर्ष के शीतल आंसुओं से सिक्त कर स्वीकार किया।
पदच्छेदः
AI
| तस्यै | तद् (४.१) | to her |
| भर्तुः | भर्तृ (६.१) | of her husband |
| अभिज्ञानम् | अभिज्ञान (२.१) | as a token of recognition |
| अङ्गुलीयम् | अङ्गुलीयक (२.१) | the ring |
| ददौ | ददौ (√दा कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | gave |
| कपिः | कपि (१.१) | the monkey |
| प्रत्युद्गतम् | प्रत्युद्गत (प्रति+उद्√गम्+क्त, १.१) | welcomed |
| इव | इव | as if |
| अनुष्णैः | अनुष्ण (३.३) | by the cool |
| तदानन्दाश्रुबिन्दुभिः | तद्–आनन्द–अश्रु–बिन्दु (३.३) | by her teardrops of joy |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.