अन्वयः
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कृती रामाय प्रत्यभिज्ञानरत्नं च अदर्शयत् । वैदेह्याः मूर्तिमत् स्वयम् आयातम् हृदयं इव ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
प्रत्यभिज्ञेति॥ कृती कृतकृत्यः कपिः स्वयमायातं मूर्तिमद्वैदेह्या हृदयमिव स्थितं तस्या एव प्रत्यभिज्ञानरत्नं च रामायादर्शयत् ॥
Summary
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The successful Hanuman showed Rama the jewel of recognition (Chudamani). It was as if Sita's own heart had arrived in personified form.
सारांश
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हनुमान ने राम को सीता का पहचान-चिह्न (चूड़ामणि) दिखाया, जो राम को वैदेही के साक्षात हृदय के समान प्रतीत हुआ।
पदच्छेदः
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| प्रत्यभिज्ञानरत्नम् | प्रत्यभिज्ञान–रत्न (२.१) | the recognition-jewel |
| च | च | and |
| रामाय | राम (४.१) | to Rama |
| अदर्शयत् | अदर्शयत् (अ√दृश् +णिच् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | showed |
| कृती | कृतिन् (१.१) | the skillful one (Hanuman) |
| हृदयम् | हृदय (२.१) | heart |
| स्वयम् | स्वयम् | itself |
| आयातम् | आयात (आ√या+क्त, २.१) | which had come |
| वैदेह्याः | वैदेही (६.१) | of Vaidehi (Sita) |
| इव | इव | like |
| मूर्तिमत् | मूर्तिमत् (२.१) | embodied |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | त्य | भि | ज्ञा | न | र | त्नं | च |
| रा | मा | या | द | र्श | य | त्कृ | ती |
| हृ | द | यं | स्व | य | मा | या | तं |
| वै | दे | ह्या | इ | व | मू | र्ति | मत् |
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