अन्वयः
AI
उदधेः कूले निविष्टं तं विभीषणः प्रपेदे । स्नेहात् राक्षसलक्ष्म्या इव बुद्धिम् आविश्य चोदितः ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
निविष्टमिति॥ उदधेः कूले निविष्टं तं रामम्। विशेषेण भीषयते शत्रूनिति विभीषणो रावणानुजः। राक्षसलक्ष्म्या स्नेहाद्बुद्धिं कर्तव्यताज्ञानमाविश्य चोदितः प्रेरित इव। प्रपेदे प्राप्तः ॥
Summary
AI
Vibhishana approached Rama, who was encamped on the ocean shore. It was as if the Royal Fortune of the Rakshasas herself had entered his mind and impelled him out of affection.
सारांश
AI
समुद्र तट पर विभीषण राम की शरण में आए, जिन्हें मानो राक्षसों की राजलक्ष्मी ने ही प्रेरित कर वहां भेजा था।
पदच्छेदः
AI
| निविष्टम् | निविष्ट (नि√विश्+क्त, २.१) | encamped |
| उदधेः | उदधि (६.१) | of the ocean |
| कूले | कूल (७.१) | on the shore |
| तम् | तद् (२.१) | him (Rama) |
| प्रपेदे | प्रपेदे (प्र√पद् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | approached |
| विभीषणः | विभीषण (१.१) | Vibhishana |
| स्नेहात् | स्नेह (५.१) | out of affection |
| राक्षसलक्ष्म्या | राक्षस–लक्ष्मी (३.१) | by the Goddess of Rakshasa fortune |
| इव | इव | as if |
| बुद्धिम् | बुद्धि (२.१) | mind |
| आविश्य | आविश्य (आ√विश्+ल्यप्) | having entered |
| चोदितः | चोदित (√चुद्+णिच्+क्त, १.१) | prompted |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | वि | ष्ट | मु | द | धेः | कू | ले |
| तं | प्र | पे | दे | वि | भी | ष | णः |
| स्ने | हा | द्रा | क्ष | स | ल | क्ष्म्ये | व |
| बु | द्धि | मा | वि | श्य | चो | दि | तः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.