अन्वयः
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तत्र दिग्विजृम्भितकाकुत्स्थपौलस्त्यजयघोषणः भीमः प्लवगरक्षसां रणः प्रववृते ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
रण इति॥ तत्र लङ्कायां प्लवगानां रक्षसां च भीमो भयंकरो दिग्विजृम्भितं काकुत्स्थः-पौलस्त्ययो राम-रावणयोर्जयघोषणं जयशब्दो यस्मिन्स तथोक्तो रणः प्रववृते प्रवृत्तः।
अस्त्रियां समरानीकरणाः कलहनिग्रहौ इत्यमरः ॥
Summary
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A terrible battle then commenced there between the monkeys and the demons, filled with the shouts of victory for both Rama (the descendant of Kakutstha) and Ravana (the son of Pulastya) echoing through all directions.
सारांश
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वहां वानरों और राक्षसों के बीच भीषण युद्ध छिड़ गया, जिसमें दिशाओं में राम और रावण के जयघोष गूँजने लगे।
पदच्छेदः
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| रणः | रण (१.१) | A battle |
| प्रववृते | प्रववृते (प्र√वृत् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | began |
| तत्र | तत्र | there |
| भीमः | भीम (१.१) | terrible |
| प्लवगरक्षसाम् | प्लवग–रक्षस् (६.३) | of the monkeys and Rakshasas |
| दिग्विजृम्भितकाकुत्स्थपौलस्त्यजयघोषणः | दिक्–विजृम्भित–काकुत्स्थ–पौलस्त्य–जय–घोषण (१.१) | in which the victory cries for Kakutstha and Paulastya resounded in all directions |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| र | णः | प्र | व | वृ | ते | त | त्र |
| भी | मः | प्ल | व | ग | र | क्ष | साम् |
| दि | ग्वि | जृ | म्भि | त | का | कु | त्स्थ |
| पौ | ल | स्त्य | ज | य | घो | ष | णः |
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