निर्ययावथ पौलस्त्यः पुनर्युद्धाय मन्दिरात् ।
अरावणमरामं वा जगदद्येति निश्चितः ॥

अन्वयः AI अथ पौलस्त्यः अद्य जगत् अरावणम् अरामं वा इति निश्चितः पुनर्युद्धाय मन्दिरात् निर्ययौ ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) निर्ययाविति॥ अथ पौलस्त्यो रावणः। अद्य जगदरावणं रावणशून्यमरामं रामशून्यं वा भवेत्। इति निश्चितो निश्चितवान्, कर्तरि क्तः। विजयमरणयोरन्यतरनिश्चयवान् पुनर्युद्धाय मन्दिरान्निर्ययौ निर्जगाम ॥
Summary AI Then Ravana, determined that by the end of the day the world would be either without Ravana or without Rama, set out once more from his palace for the final battle.
सारांश AI इसके बाद रावण पुनः युद्ध के लिए महल से निकला। उसने यह दृढ़ निश्चय कर लिया था कि आज यह संसार या तो रावण रहित होगा या राम रहित।
पदच्छेदः AI
निर्ययौनिर्ययौ (निर्√या कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) came out
अथअथ Then
पौलस्त्यःपौलस्त्य (१.१) Paulastya (Ravana)
पुनःपुनर् again
युद्धाययुद्ध (४.१) for battle
मन्दिरात्मन्दिर (५.१) from his palace
अरावणम्रावण (१.१) without Ravana
अरामम्राम (१.१) without Rama
वावा or
जगत्जगत् (१.१) the world
अद्यअद्य today
इतिइति thus
निश्चितःनिश्चित (निर्√चि+क्त, १.१) having resolved
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
नि र्य या पौ स्त्यः
पु र्यु द्धा न्दि रात्
रा रा मं वा
द्ये ति नि श्चि तः
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