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विक्रमव्यतिहारेण सामान्याऽभूद्द्वयोरपि ।
जयश्रीरन्तरा वेदिर्मत्तवारणयोरिव ॥

अन्वयः AI विक्रमव्यतिहारेण जयश्रीः मत्तवारणयोः अन्तरा वेदिः इव द्वयोः अपि सामान्या अभूत् ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) विक्रमेति॥ जयश्रीर्विक्रमस्य व्यतिहारेण पर्यायक्रमेण तयोर्द्वयोरपि। अन्तरा मध्ये। अव्ययमेतत्। वेदिर्वेद्याकारा भित्तिर्मत्तवारणयोरिव। सामान्या साधारणाऽभूत्। न त्वन्यतरनियतेत्यर्थः। अत्र मत्तवारणयोःइत्यत्र द्वयोःइत्यत्र च अन्तरान्तरेण युक्ते (अष्टाध्यायी २.३.४ ) इति द्वितीया न भवति। अन्तरा शब्दस्योक्तरीत्याऽन्यत्रान्वयात्। मध्ये कामपि भित्तिं कृत्वा गजौ योधयन्तीति प्रसिद्धिः ॥
Summary AI Due to the equal exchange of valor between the two warriors, the Goddess of Victory remained undecided between them, appearing like an altar situated between two equally matched, intoxicated elephants.
सारांश AI पराक्रम के आदान-प्रदान से विजयलक्ष्मी उन दोनों के बीच वैसी ही सामान्य थी, जैसे दो मतवाले हाथियों के बीच की वेदी।
पदच्छेदः AI
विक्रमव्यतिहारेणविक्रमव्यतिहार (३.१) due to the exchange of valor
सामान्यासामान्य (१.१) common / undecided
अभूत्अभूत् (√भू कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) became
द्वयोःद्वि (६.२) of the two
अपिअपि also
जयश्रीःजयश्री (१.१) the goddess of victory
अन्तराअन्तरा between
वेदिःवेदि (१.१) ground
मत्तवारणयोःमत्तवारण (६.२) of two intoxicated elephants
इवइव like
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
वि क्र व्य ति हा रे
सा मा न्या ऽभू द्द्व यो पि
श्री न्त रा वे दि
र्म त्त वा यो रि
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