वेलानिलाय प्रसृता भुजंगा
महोर्मिविस्फूर्जथुनिर्विशेषाः ।
सूर्यांशुसंपर्कसमृद्धरागै-
र्व्यज्यन्त एते मणिभिः फणस्थैः ॥
वेलानिलाय प्रसृता भुजंगा
महोर्मिविस्फूर्जथुनिर्विशेषाः ।
सूर्यांशुसंपर्कसमृद्धरागै-
र्व्यज्यन्त एते मणिभिः फणस्थैः ॥
महोर्मिविस्फूर्जथुनिर्विशेषाः ।
सूर्यांशुसंपर्कसमृद्धरागै-
र्व्यज्यन्त एते मणिभिः फणस्थैः ॥
अन्वयः
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वेला-अनिलाय प्रसृताः, महत्-ऊर्मि-विस्फूर्जथु-निर्विशेषाः एते भुजंगाः फण-स्थैः सूर्य-अंशु-संपर्क-समृद्ध-रागैः मणिभिः व्यज्यन्ते ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
वेलेति॥ वैलानिलाय। वेलानिलं पातुमित्यर्थः।
क्रियार्थोपपद- (अष्टाध्यायी २.३.१४ ) इत्यादिना चतुर्थी। प्रसृता निर्गता महोर्मीणां विस्फूर्जथुरुद्रेकः। ट्वितोऽथुच् (अष्टाध्यायी ३.३.८९ ) इत्यथुच्प्रत्ययः। तस्मान्निर्विशेषा दुर्ग्रहमेदा एते भुजंगाः सूर्यांशुसंपर्केण समृद्धरागैः प्रवृद्धकान्तिभिः फणस्थैर्मणिभिर्व्यज्यन्त उन्नीयन्ते ॥
Summary
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"These serpents, stretched out to enjoy the sea-breeze and indistinguishable from the great waves, are revealed only by the gems on their hoods, whose brilliant colors are enhanced by the sun's rays."
सारांश
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तट की वायु के लिए आए हुए सर्प लहरों जैसे ही लग रहे हैं, किंतु उनके फणों पर स्थित मणियों की चमक उन्हें लहरों से अलग पहचान दे रही है।
पदच्छेदः
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| वेला-अनिलाय | वेला–अनिल (४.१) | for the shore-breeze |
| प्रसृताः | प्रसृत (प्र√सृ+क्त, १.३) | stretched out |
| भुजंगाः | भुजंग (१.३) | serpents |
| महत्-ऊर्मि-विस्फूर्जथु-निर्विशेषाः | महत्–ऊर्मि–विस्फूर्जथु–निर्विशेष (१.३) | indistinguishable from the swelling of the great waves |
| सूर्य-अंशु-संपर्क-समृद्ध-रागैः | सूर्य–अंशु–संपर्क–समृद्ध–राग (३.३) | whose colors are enriched by contact with the sun's rays |
| व्यज्यन्ते | व्यज्यन्ते (वि√अन्ज् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | are revealed |
| एते | एतद् (१.३) | these |
| मणिभिः | मणि (३.३) | by the gems |
| फण-स्थैः | फण–स्थ (३.३) | situated on their hoods |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वे | ला | नि | ला | य | प्र | सृ | ता | भु | जं | गा |
| म | हो | र्मि | वि | स्फू | र्ज | थु | नि | र्वि | शे | षाः |
| सू | र्यां | शु | सं | प | र्क | स | मृ | द्ध | रा | गै |
| र्व्य | ज्य | न्त | ए | ते | म | णि | भिः | फ | ण | स्थैः |
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