क्वचित्पथा संचरते सुराणां
क्वचिद्धनानां पततां क्वचिञ्च ।
यथाविधो मे मनसोऽभिलाषः
प्रवर्तते पश्य तथा विमानम् ॥
क्वचित्पथा संचरते सुराणां
क्वचिद्धनानां पततां क्वचिञ्च ।
यथाविधो मे मनसोऽभिलाषः
प्रवर्तते पश्य तथा विमानम् ॥
क्वचिद्धनानां पततां क्वचिञ्च ।
यथाविधो मे मनसोऽभिलाषः
प्रवर्तते पश्य तथा विमानम् ॥
अन्वयः
AI
पश्य, विमानम् क्वचित् सुराणाम् पथा, क्वचित् घनानाम्, क्वचित् च पतताम् (पथा) संचरते । मे मनसः यथा-विधः अभिलाषः (भवति), तथा प्रवर्तते ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
क्वचिदिति॥ हे देवि! विमानं पुष्पकं मे मनसोऽभिलाषो यथआविधस्तथा प्रवर्तते पशअय। क्वचित् सुराणां पथा संचरते। क्वचिद्धनानां क्वचित्पततां पक्षिणां च पथा संचरते।
समस्तृतीयायुक्तात् (अष्टाध्यायी १.३.५४ ) इति संपूर्वाञ्चरतेरात्मनेपदम् ॥
Summary
AI
"See, this celestial car moves as I wish: sometimes on the path of the gods, sometimes of the clouds, and sometimes of the birds. It proceeds according to whatever desire arises in my mind."
सारांश
AI
देखो, यह पुष्पक विमान मेरी इच्छानुसार कभी देवताओं के मार्ग में, कभी बादलों में और कभी पक्षियों के मार्ग में विचरण कर रहा है।
पदच्छेदः
AI
| क्वचित् | क्वचित् | sometimes |
| पथा | पथिन् (३.१) | by the path |
| संचरते | संचरते (सम्√चर् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | it moves |
| सुराणाम् | सुर (६.३) | of the gods |
| क्वचित् | क्वचित् | sometimes |
| घनानाम् | घन (६.३) | of the clouds |
| पतताम् | पतत् (६.३) | of the birds |
| क्वचित् | क्वचित् | and sometimes |
| च | च | and |
| यथा-विधः | यथाविध (१.१) | whatever kind |
| मे | अस्मद् (६.१) | my |
| मनसः | मनस् (६.१) | of the mind |
| अभिलाषः | अभिलाष (१.१) | desire |
| प्रवर्तते | प्रवर्तते (प्र√वृत् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | it proceeds |
| पश्य | पश्य (√दृश् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | see |
| तथा | तथा | so |
| विमानम् | विमान (१.१) | the celestial car |
छन्दः
उपेन्द्रवज्रा [११: जतजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क्व | चि | त्प | था | सं | च | र | ते | सु | रा | णां |
| क्व | चि | द्ध | ना | नां | प | त | तां | क्व | चि | ञ्च |
| य | था | वि | धो | मे | म | न | सो | ऽभि | ला | षः |
| प्र | व | र्त | ते | प | श्य | त | था | वि | मा | नम् |
| ज | त | ज | ग | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.