Loading data... On slow networks this could take a few minutes.
100%

वैदेहि पश्याऽऽमलयाद्विभक्तं
मत्सेतुना फेनिलमम्बुराशिम् ।
छायापथेनेव शरत्प्रसन्न-
माकाशमाविष्कृतचारुतारम् ॥

अन्वयः AI वैदेहि! मत्-सेतुना आमलयात् विभक्तम् फेनिलम् अम्बु-राशिम् पश्य । (अयम्) शरत्-प्रसन्नम् आविष्कृत-चारु-तारम् आकाशम् छाया-पथेन इव (भाति) ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) वैदेहीति॥ हे वैदेहि सीते! आ मलयान्मलयपर्यन्तम्। पञ्चम्यपाङ्परिभिः (अष्टाध्यायी २.३.१० ) इति पञ्चमी। पदद्वयं चैतत्। मत्सेतुना विभक्तं द्विधा कृतम्। अत्यायतसेतुनेत्यर्थः। हर्षाधिक्याञ्च मद्ग्रहणम्। फेनिलं फेनवन्तम्। फेनादिलञअच (अष्टाध्यायी ५.२.९९ ) इतीलच्प्रत्ययः। क्षिप्रकारी चायमिति भावः। अम्बुराशिम्। छायापथेन विभक्तं शरत्प्रसन्नमाविष्कृतचारुतारमाकाशमिव। पश्य। मम महानयं प्रयासस्त्वदर्थं इति हृदयम्। छायापथो नाम ज्योतिश्चक्रमध्यवर्ती कश्चित्तिरश्चीनोऽवकाशः ॥
Summary AI "O Vaidehi, look at the foamy ocean, divided from the Malaya mountain by my bridge. It resembles the clear autumn sky with its beautiful stars revealed, appearing as if divided by the Milky Way."
सारांश AI हे वैदेही! मेरे द्वारा बनाए गए सेतु से दो भागों में विभक्त इस फेनिल समुद्र को देखो, जो शरतकालीन स्वच्छ आकाश में मंदाकिनी (आकाशगंगा) जैसा प्रतीत हो रहा है।
पदच्छेदः AI
वैदेहिवैदेहि (८.१) O Vaidehi
पश्यपश्य (√दृश् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) look
आमलयात्आ मलय (५.१) from the Malaya mountain
विभक्तम्विभक्त (वि√भज्+क्त, २.१) divided
मत्-सेतुनामद्सेतु (३.१) by my bridge
फेनिलम्फेनिल (२.१) foamy
अम्बु-राशिम्अम्बुराशि (२.१) the mass of water (ocean)
छाया-पथेनछायापथ (३.१) by the Milky Way
इवइव like
शरत्-प्रसन्नम्शरद्प्रसन्न (२.१) clear as in autumn
आकाशम्आकाश (२.१) the sky
आविष्कृत-चारु-तारम्आविष्कृतचारुतारा (२.१) with its beautiful stars revealed
छन्दः इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
वै दे हि श्या ऽऽम या द्वि क्तं
त्से तु ना फे नि म्बु रा शिम्
छा या थे ने त्प्र न्न
मा का मा वि ष्कृ चा रु ता रम्
About

Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.