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सैषा स्थली यत्र विचिन्वता त्वां
भ्रष्टां मया नूपुरमेकमुर्व्याम् ।
अदृश्यत त्वञ्चरणारविन्द-
विश्लेषदुःखादिव बद्धमौनम् ॥

अन्वयः AI एषा सा स्थली, यत्र भ्रष्टाम् त्वाम् विचिन्वता मया उर्व्याम् एकम् नूपुरम् अदृश्यत, यत् त्वत्-चरण-अरविन्द-विश्लेष-दुःखात् बद्धमौनम् इव स्थितम् आसीत् ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) सैषेति॥ सा पूर्वानुभूता स्थल्येषा। दृशअयत इत्यर्थः। यत्र स्थल्यां त्वां विचिन्वताऽन्विष्यता मया। त्वञअचरणारविन्देन यो विश्लेषो वियोगस्तेन यद्दुःखं तस्मादिव बद्धमौनं निःशब्दम्। उर्व्यां भ्रष्टमेकं नूपुरं मञ्जीरः। मञ्जरो नूपुरोऽस्त्रियाम् इत्यमरः। अदृश्यत दृष्टम्। हेतूत्प्रेक्षा॥
Summary AI Rama shows Sita the spot where, while searching for her after she was lost, he saw a single anklet on the ground. It seemed to be silent, as if grieving from the pain of separation from her lotus-like foot.
सारांश AI यह वही स्थान है जहाँ तुम्हें खोजते समय मुझे पृथ्वी पर गिरा तुम्हारा एक नूपुर मिला था, जो तुम्हारे चरण-कमलों से बिछड़ने के दुःख के कारण मानो मौन हो गया था।
पदच्छेदः AI
सातद् (१.१) That
एषाएतद् (१.१) is this
स्थलीस्थली (१.१) place
यत्रयत्र where
विचिन्वताविचिन्वत् (वि√चि+शतृ, ३.१) by (me) searching
त्वाम्युष्मद् (२.१) for you
भ्रष्टाम्भ्रष्ट (√भ्रंश्+क्त, २.१) who was lost
मयाअस्मद् (३.१) by me
नूपुरम्नूपुर (१.१) anklet
एकम्एक (१.१) one
उर्व्याम्उर्वी (७.१) on the ground
अदृश्यतअदृश्यत (√दृश् भावकर्मणोः लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) was seen
त्वच्चरणारविन्दविश्लेषदुःखात्त्वद्चरणअरविन्दविश्लेषदुःख (५.१) from the sorrow of separation from your lotus-feet
इवइव as if
बद्धमौनम्बद्धमौन (१.१) bound in silence
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
सै षा स्थ ली त्र वि चि न्व ता त्वां
भ्र ष्टां या नू पु मे मु र्व्याम्
दृ श्य त्व ञ्च णा वि न्द
वि श्ले दुः खा दि द्ध मौ नम्
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