इमां तटाशोकलतां च त्वीं
स्तनाभिरामस्तबकाभिनम्राम् ।
त्वत्प्राप्तिबुद्ध्या परिरब्धुकामः
सौमित्रिणा साश्रुरहं निषिद्धः ॥

अन्वयः AI अहम् त्वत्-प्राप्ति-बुद्ध्या स्तन-अभिराम-स्तबक-अभिनम्राम् इमाम् तन्वीम् तट-अशोक-लताम् परिरब्धु-कामः सन्, स-अश्रुः सौमित्रिणा निषिद्धः अभवम् ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) इमामिति॥ किंच स्तनवदभिरामाभ्यां स्तबकाभ्यामभिनम्नां तन्वीमिमां तटाशोकस्य लतां शाखाम् , अतस्त्वत्प्राप्तिबुद्धअया त्वमेव प्राप्तेति भ्रान्त्या परिरब्धुमालिङ्गितुं कामो यस्य सोऽहं सौमित्रिणा लक्ष्मणेन साश्रुर्निषिद्धः नेयं सीतेति निवारितः। परिरब्धुकामइत्यत्र तुं काममनसोरपि इति वचनान्मकारलोपः ॥
Summary AI Mistaking this slender Ashoka creeper on the bank, which was bowed down with clusters of flowers lovely like breasts, for you, I was about to embrace it. Desirous and in tears, I was restrained by Lakshmana.
सारांश AI तट पर स्थित स्तनों के समान सुंदर गुच्छों से झुकी इस अशोक लता को तुम्हें प्राप्त करने की बुद्धि से जब मैं गले लगाना चाहता था, तब लक्ष्मण ने आँसुओं के साथ मुझे रोका था।
पदच्छेदः AI
इमाम्इदम् (२.१) this
तटाशोकलतांतटअशोकलता (२.१) Ashoka creeper on the bank
and
तन्वीम्तन्वी (२.१) slender
स्तनाभिरामस्तबकाभिनम्राम्स्तनअभिरामस्तबक–अभिनम्रा (२.१) bowed down with clusters of flowers lovely like breasts
त्वत्प्राप्तिबुद्ध्यात्वद्प्राप्तिबुद्धि (३.१) with the thought of having found you
परिरब्धुकामःपरिरब्धुम्काम (१.१) desirous of embracing
सौमित्रिणासौमित्रि (३.१) by Saumitri (Lakshmana)
साश्रुःअश्रु (१.१) with tears
अहम्अस्मद् (१.१) I
निषिद्धःनिषिद्ध (नि√सिध्+क्त, १.१) was restrained
छन्दः इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
मां टा शो तां त्वीं
स्त ना भि रा स्त का भि म्राम्
त्व त्प्रा प्ति बु द्ध्या रि ब्धु का मः
सौ मि त्रि णा सा श्रु हं नि षि द्धः
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