अमूर्विमानान्तरलम्बिनीनां
श्रुत्वा स्वनं काञ्चनकिङ्किणीनाम् ।
प्रत्युद्द्रजन्तीव खमुत्पतन्त्यो
गोदावरीसारसपङ्क्तयस्त्वाम् ॥
अमूर्विमानान्तरलम्बिनीनां
श्रुत्वा स्वनं काञ्चनकिङ्किणीनाम् ।
प्रत्युद्द्रजन्तीव खमुत्पतन्त्यो
गोदावरीसारसपङ्क्तयस्त्वाम् ॥
श्रुत्वा स्वनं काञ्चनकिङ्किणीनाम् ।
प्रत्युद्द्रजन्तीव खमुत्पतन्त्यो
गोदावरीसारसपङ्क्तयस्त्वाम् ॥
अन्वयः
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गोदावरी-सारस-पङ्क्तयः विमान-अन्तर-लम्बिनीनाम् काञ्चन-किङ्किणीनाम् स्वनम् श्रुत्वा, त्वाम् प्रति-उद्-व्रजन्ति इव खम् उत्पतन्त्यः सन्ति ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अमूरिति॥ विमानस्यान्तरेष्ववकाशेषु लम्बंन्ते यास्तासां काञ्चनकिङ्किणीनां स्वनं श्रुत्वा स्वयूथशब्दभ्रमात्खमाकाशमुत्पतन्त्योऽमूर्गोदावरीसारसपङ्क्तयस्त्वां प्रत्युद्द्रजन्तीव ॥
Summary
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Look, these rows of Sarasa birds from the Godavari river, hearing the sound of the golden bells hanging inside our celestial car, are flying up into the sky as if to come forth and greet you.
सारांश
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इस विमान में लगी स्वर्ण घंटियों की आवाज सुनकर गोदावरी के तट पर रहने वाले सारसों की ये पंक्तियाँ आकाश में उड़कर मानो तुम्हारा स्वागत करने आ रही हैं।
पदच्छेदः
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| अमूः | अदस् (१.३) | These |
| विमानान्तरलम्बिनीनां | विमान–अन्तर–लम्बिनी (६.३) | of the (bells) hanging inside the celestial car |
| श्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु+क्त्वा) | having heard |
| स्वनम् | स्वन (२.१) | the sound |
| काञ्चनकिङ्किणीनाम् | काञ्चन–किङ्किणी (६.३) | of the golden bells |
| प्रत्युद्द्रजन्ति | प्रत्युद्द्रजन्ति (प्रति+उद्√व्रज् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | come forth to meet |
| इव | इव | as if |
| खम् | ख (२.१) | the sky |
| उत्पतन्त्यः | उत्पतन्ती (उद्√पत्+शतृ, १.३) | flying up |
| गोदावरीसारसपङ्क्तयः | गोदावरी–सारस–पङ्क्ति (१.३) | the rows of Sarasa birds from the Godavari |
| त्वाम् | युष्मद् (२.१) | you |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | मू | र्वि | मा | ना | न्त | र | ल | म्बि | नी | नां |
| श्रु | त्वा | स्व | नं | का | ञ्च | न | कि | ङ्कि | णी | नाम् |
| प्र | त्यु | द्द्र | ज | न्ती | व | ख | मु | त्प | त | न्त्यो |
| गो | दा | व | री | सा | र | स | प | ङ्क्त | य | स्त्वाम् |
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