अन्वयः
AI
पेशल-मध्यया त्वया घट-अम्बु-संवर्धित-बाल-चूता उन्मुख-कृष्ण-सारा एषा पञ्चवटी चिरात् दृष्टा सती अपि मे मनः आनन्दयति ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
एषेति॥ पेशलमध्ययापि। भाराक्षमयापीत्यर्थः। त्वया घटाम्बुभिः संवर्धिता बालचूता यस्याः सा। उन्मुखा अस्मदभिमुखा त्वत्संवर्धिता एव कृष्णसारा यस्याः सा चिराद्दृष्टैषा पञ्चवती मे मन आनन्दयत्याह्लादयति।
पञ्चवटीशब्दः पूर्वमेव व्याख्यातः ॥
Summary
AI
This is Panchavati, where you, with your slender waist, nurtured a young mango tree with water from a pot, and where black antelopes now look up. Seeing it again after so long delights my heart.
सारांश
AI
हे सुकुमारी! तुम्हारे द्वारा घड़ों के जल से सींचे गए छोटे आम के वृक्षों वाली यह पंचवटी, ऊपर की ओर देखते हुए काले मृगों के साथ आज चिरकाल बाद मेरे मन को आनंदित कर रही है।
पदच्छेदः
AI
| एषा | एतद् (१.१) | This |
| त्वया | युष्मद् (३.१) | by you |
| पेशलमध्यया | पेशल–मध्य (३.१) | by you with a slender waist |
| अपि | अपि | even |
| घटाम्बुसंवर्धितबालचूता | घट–अम्बु–संवर्धित–बाल–चूत (१.१) | in which the young mango tree was nurtured with water from a pot |
| आनन्दयति | आनन्दयति (आ√नन्द् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | delights |
| उन्मुखकृष्णसारा | उन्मुख–कृष्णसार (१.१) | where the black antelopes look up |
| दृष्टा | दृष्ट (√दृश्+क्त, १.१) | seen |
| चिरात् | चिरात् | after a long time |
| पञ्चवटी | पञ्चवटी (१.१) | Panchavati |
| मनः | मनस् (२.१) | my mind |
| मे | अस्मद् (६.१) | my |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | षा | त्व | या | पे | श | ल | म | ध्य | या | पि |
| घ | टा | म्बु | सं | व | र्धि | त | बा | ल | चू | ता |
| आ | न | न्द | य | त्यु | न्मु | ख | कृ | ष्ण | सा | रा |
| दृ | ष्टा | चि | रा | त्प | ञ्च | व | टी | म | नो | मे |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.