एतन्मुनेर्मानिनि शातकर्णेः
पञ्चाप्सरो नाम विहारवारि ।
आभाति पर्यन्तवनं विदूरा-
न्मेघान्तरालक्ष्यमिवेन्दुबिम्बम् ॥
एतन्मुनेर्मानिनि शातकर्णेः
पञ्चाप्सरो नाम विहारवारि ।
आभाति पर्यन्तवनं विदूरा-
न्मेघान्तरालक्ष्यमिवेन्दुबिम्बम् ॥
पञ्चाप्सरो नाम विहारवारि ।
आभाति पर्यन्तवनं विदूरा-
न्मेघान्तरालक्ष्यमिवेन्दुबिम्बम् ॥
अन्वयः
AI
मानिनि! शातकर्णेः मुनेः पञ्च-अप्सरः नाम एतत् विहार-वारि पर्यन्त-वनम् सत् विदूरत् मेघ-अन्तर-आलक्ष्यम् इन्दु-बिम्बम् इव आभाति ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
एतदिति॥ हे मानिनि! शातकर्णेर्मुनेः संबन्धि पञ्चाप्सरो नाम
पञ्चाप्सरइति प्रसिद्धम्। पञ्च अप्सरसो यस्मिन्निति विग्रहः। पर्यन्तेषु वनानि यस्य तत्पर्यन्तवनमेतद्विहारवारि क्रीडासरो विदूरात्। मेघानामन्तरे मध्य आलक्ष्यमीषद्दृश्यम्। आङीषदर्थेऽभिव्याप्तौ। इन्दुबिम्बमिव। आभाति ॥
Summary
AI
"O proud lady," says Rama, "this is the pleasure-lake of the sage Shatakarni, named Panchapsaras. Surrounded by forests on its borders, it shines from a distance like the disc of the moon faintly visible between clouds."
सारांश
AI
हे मानिनी! महर्षि शातकर्णी का यह 'पंचाप्सरस' नामक सरोवर है, जो चारों ओर वनों से घिरा होने के कारण दूर से बादलों के बीच दिखाई देने वाले चंद्रमा के समान लग रहा है।
पदच्छेदः
AI
| एतत् | एतद् (१.१) | This |
| मुनेः | मुनि (६.१) | of the sage |
| मानिनि | मानिनी (८.१) | O proud lady! |
| शातकर्णेः | शातकर्णि (६.१) | Shatakarni |
| पञ्चाप्सरः | पञ्चन्–अप्सरस् (१.१) | Panchapsaras |
| नाम | नाम | by name |
| विहारवारि | विहार–वारि (१.१) | pleasure-lake |
| आभाति | आभाति (आ√भा कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | shines |
| पर्यन्तवनं | पर्यन्त–वन (१.१) | with forests on its borders |
| विदूरात् | विदूरात् | from a distance |
| मेघान्तरालक्ष्यम् | मेघ–अन्तर–आलक्ष्य (१.१) | faintly visible between clouds |
| इव | इव | like |
| इन्दुबिम्बम् | इन्दु–बिम्ब (१.१) | the disc of the moon |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | त | न्मु | ने | र्मा | नि | नि | शा | त | क | र्णेः |
| प | ञ्चा | प्स | रो | ना | म | वि | हा | र | वा | रि |
| आ | भा | ति | प | र्य | न्त | व | नं | वि | दू | रा |
| न्मे | घा | न्त | रा | ल | क्ष्य | मि | वे | न्दु | बि | म्बम् |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.