गर्भं दधत्यर्कमरीचयोऽस्मा-
द्विवृद्धिमत्राश्नुवते वसूनि ।
अबिन्धनं वह्निमसौ बिभर्ति
प्रह्लादनं ज्योतिरजन्यनेन ॥
गर्भं दधत्यर्कमरीचयोऽस्मा-
द्विवृद्धिमत्राश्नुवते वसूनि ।
अबिन्धनं वह्निमसौ बिभर्ति
प्रह्लादनं ज्योतिरजन्यनेन ॥
द्विवृद्धिमत्राश्नुवते वसूनि ।
अबिन्धनं वह्निमसौ बिभर्ति
प्रह्लादनं ज्योतिरजन्यनेन ॥
अन्वयः
AI
अर्क-मरीचयः अस्मात् गर्भम् दधति । अत्र वसूनि विवृद्धिम् अश्नुवते । असौ अबिन्धनम् वह्निम् बिभर्ति । येन प्रह्लादनम् ज्योतिः अजनि ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
गर्भमिति॥ अर्कमरीचयोऽस्मादब्धेः। अपादानात्। गर्भमम्मयं दधति। वृष्ट्यर्थमित्यर्थः। अयमर्थो दशमसर्गे
ताभिर्गर्भः-(५८)इत्यत्र स्पष्टीकृतः। अयं लोकोपकारीति भावः। अत्राब्धौ वसूनि धनानि। धने रत्ने वसु स्मृतम्इति विश्वः। विवृद्धिमश्नुवते प्राप्नुवन्ति। संपद्वानित्यर्थः। असौ। आप इन्धनं दाह्यं यस्य तद्दाहकं वह्निं बिभर्ति। अपकारेऽप्याश्रितं न त्यजतीति भावः। अनेन प्रह्लादनमाह्लादकं ज्योतिश्चन्द्रोऽजनि जनितम्। जनेर्ण्यन्तात्कर्मणि लुङ्। सौम्य इति भावः ॥
Summary
AI
"From this ocean, the sun's rays draw up water for clouds. Here, gems attain growth. It holds the submarine fire that burns without fuel, and from it, the delightful moon was born."
सारांश
AI
सूर्य की किरणें यहीं से जल रूपी गर्भ धारण करती हैं, यहीं रत्नों की वृद्धि होती है, यह बड़वानल को थामे हुए है और इसी से आनंददायी चंद्रमा उत्पन्न हुआ है।
पदच्छेदः
AI
| गर्भम् | गर्भ (२.१) | embryo (of clouds) |
| दधति | दधति (√धा कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | they hold |
| अर्क-मरीचयः | अर्क–मरीचि (१.३) | the rays of the sun |
| अस्मात् | इदम् (५.१) | from this (ocean) |
| विवृद्धिम् | विवृद्धि (२.१) | growth |
| अत्र | अत्र | here |
| अश्नुवते | अश्नुवते (√अश् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | they attain |
| वसूनि | वसु (२.३) | treasures (gems) |
| अबिन्धनम् | अबिन्धन (२.१) | without fuel |
| वह्निम् | वह्नि (२.१) | fire (submarine fire) |
| असौ | अदस् (१.१) | this (ocean) |
| बिभर्ति | बिभर्ति (√भृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | it holds |
| प्रह्लादनम् | प्रह्लादन (२.१) | delightful |
| ज्योतिः | ज्योतिस् (१.१) | light (the moon) |
| अजनि | अजनि (√जन् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was born |
| येन | यद् (३.१) | by which (ocean) |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ग | र्भं | द | ध | त्य | र्क | म | री | च | यो | ऽस्मा |
| द्वि | वृ | द्धि | म | त्रा | श्नु | व | ते | व | सू | नि |
| अ | बि | न्ध | नं | व | ह्नि | म | सौ | बि | भ | र्ति |
| प्र | ह्ला | द | नं | ज्यो | ति | र | ज | न्य | ने | न |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.