अदः शरण्यं शरभङ्गनाम्न-
स्तपोवनं पावनमाहिताग्नेः ।
चिराय संतर्प्य समिद्भिरग्निं
यो मन्त्रपूतां तनुमप्यहौषीत् ॥
अदः शरण्यं शरभङ्गनाम्न-
स्तपोवनं पावनमाहिताग्नेः ।
चिराय संतर्प्य समिद्भिरग्निं
यो मन्त्रपूतां तनुमप्यहौषीत् ॥
स्तपोवनं पावनमाहिताग्नेः ।
चिराय संतर्प्य समिद्भिरग्निं
यो मन्त्रपूतां तनुमप्यहौषीत् ॥
अन्वयः
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अदः शरभङ्ग-नाम्नः आहिताग्नेः शरण्यम् पावनम् तपोवनम् (अस्ति)। यः चिराय समिद्भिः अग्निम् संतर्प्य, मन्त्र-पूताम् तनुम् अपि अहौषीत्।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अद इति॥ शरणे रक्षणे साधु शरण्यम्। पावयतीति पावनम्। अदो दृश्यमानं तपोवनमाहिताग्नेः शरभङ्गनाम्नो मुनेः संबन्धि। यः शरभङ्गश्चिरायचिरमग्निं समिद्भिः संतर्प्य तर्पयित्वा ततो मन्त्रैः पूतां शुद्धां तनुमप्यहौषीद्धुतवान्। जुहोतेर्लुङ् ॥
Summary
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That is the holy penance grove, a refuge, belonging to the sage named Sharabhanga, who maintained the sacred fires. After gratifying the fire with fuel for a long time, he offered even his own mantra-purified body as an oblation.
सारांश
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यह शरभंग ऋषि का पवित्र आश्रम है, जिन्होंने विधिवत अग्नि सेवा के पश्चात अंत में मंत्रों से पवित्र अपने शरीर को भी अग्नि को ही समर्पित कर दिया था।
पदच्छेदः
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| अदः | अदस् (१.१) | that |
| शरण्यम् | शरण्य (१.१) | offering refuge |
| शरभङ्गनाम्नः | शरभङ्ग–नामन् (६.१) | of the one named Sharabhanga |
| तपोवनम् | तपोवन (१.१) | penance grove |
| पावनम् | पावन (१.१) | holy |
| आहिताग्नेः | आहिताग्नि (६.१) | of one who maintained sacred fires |
| चिराय | चिराय | for a long time |
| संतर्प्य | संतर्प्य (सं√तृप्+ल्यप्) | having gratified |
| समिद्भिः | समिध् (३.३) | with sacrificial fuel |
| अग्निम् | अग्नि (२.१) | the fire |
| यः | यद् (१.१) | who |
| मन्त्रपूताम् | मन्त्र–पूत (२.१) | purified by mantras |
| तनुम् | तनु (२.१) | body |
| अपि | अपि | even |
| अहौषीत् | अहौषीत् (√हु कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | offered as oblation |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | दः | श | र | ण्यं | श | र | भ | ङ्ग | ना | म्न |
| स्त | पो | व | नं | पा | व | न | मा | हि | ता | ग्नेः |
| चि | रा | य | सं | त | र्प्य | स | मि | द्भि | र | ग्निं |
| यो | म | न्त्र | पू | तां | त | नु | म | प्य | हौ | षीत् |
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