अत्राभिषेकाय तपोधनानां
सप्तर्षिहस्तोद्धृतहेमपद्माम् ।
प्रवर्तयामास किलानसूया
त्रिस्रोतसं त्र्यम्बकमौलिमालाम् ॥
अत्राभिषेकाय तपोधनानां
सप्तर्षिहस्तोद्धृतहेमपद्माम् ।
प्रवर्तयामास किलानसूया
त्रिस्रोतसं त्र्यम्बकमौलिमालाम् ॥
सप्तर्षिहस्तोद्धृतहेमपद्माम् ।
प्रवर्तयामास किलानसूया
त्रिस्रोतसं त्र्यम्बकमौलिमालाम् ॥
अन्वयः
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अत्र किल अनसूया तपोधनानाम् अभिषेकाय, सप्तर्षिहस्तोद्धृतहेमपद्मां त्र्यम्बकमौलिमालां त्रिस्रोतसं प्रवर्तयामास।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अत्रेति॥ अत्र वनेऽनसूयाऽत्रिपत्नी। सप्त च ते ऋषयश्च सप्तर्षयः।
दिक्संखअये संज्ञायाम् (अष्टाध्यायी २.१.५० ) इति तत्पुरुषसमासः। तेषां हस्तौरुद्धृतानि हेमपद्मानि यस्यास्तां त्र्यम्बकमौलिमालां हरशिरःस्रजं त्रिस्रोतप्तं भागीरथीं तपोधनानामृषीणामभिषेकाय स्नानाय प्रवर्तयामास प्रवाहयामास। किलेत्यैतिह्ये ॥
Summary
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It is said that here, for the ritual bathing of the ascetics, Anasuya (wife of Atri) caused the three-streamed Ganga—the very garland from Shiva's head, from which the Seven Sages plucked golden lotuses—to flow.
सारांश
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यहीं ऋषियों के स्नान के लिए अनसूया ने गंगा को उतारा था, जिसके जल में सप्तर्षियों ने स्वर्ण कमलों का चयन किया था।
पदच्छेदः
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| अत्र | अत्र | here |
| अभिषेकाय | अभिषेक (४.१) | for ritual bathing |
| तपोधनानाम् | तपोधन (६.३) | of the ascetics |
| सप्तर्षिहस्तोद्धृतहेमपद्माम् | सप्तर्षि–हस्त–उद्धृत–हेम–पद्म (२.१) | from which golden lotuses were plucked by the hands of the Seven Sages |
| प्रवर्तयामास | प्रवर्तयामास (प्र√वृत् +णिच् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | caused to flow |
| किल | किल | indeed |
| अनसूया | अनसूया (१.१) | Anasuya |
| त्रिस्रोतसम् | त्रिस्रोतस् (२.१) | the three-streamed one (Ganga) |
| त्र्यम्बकमौलिमालाम् | त्र्यम्बक–मौलि–माला (२.१) | the garland on Shiva's head |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | त्रा | भि | षे | का | य | त | पो | ध | ना | नां |
| स | प्त | र्षि | ह | स्तो | द्धृ | त | हे | म | प | द्माम् |
| प्र | व | र्त | या | मा | स | कि | ला | न | सू | या |
| त्रि | स्रो | त | सं | त्र्य | म्ब | क | मौ | लि | मा | लाम् |
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