क्वचित्प्रभालेपिभिरिन्द्रनीलै-
र्मुक्तामयी यष्टिरिवानुविद्धा ।
अन्यत्र माला सितपङ्कजाना-
मिन्दीवरैरुत्खचितान्तरेव ॥
क्वचित्प्रभालेपिभिरिन्द्रनीलै-
र्मुक्तामयी यष्टिरिवानुविद्धा ।
अन्यत्र माला सितपङ्कजाना-
मिन्दीवरैरुत्खचितान्तरेव ॥
र्मुक्तामयी यष्टिरिवानुविद्धा ।
अन्यत्र माला सितपङ्कजाना-
मिन्दीवरैरुत्खचितान्तरेव ॥
अन्वयः
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(एषा गङ्गा) क्वचित् प्रभा-लेपिभिः इन्द्रनीलैः अनुविद्धा मुक्तामयी यष्टिः इव (भाति)। अन्यत्र इन्दीवरैः उत्खचित-अन्तरा सित-पङ्कजानाम् माला इव (भाति)।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
हे अनवद्याङअगि! यमुनातरङ्गैर्भिन्नप्रवाहा व्यामिश्रौघा गङ्गा जाह्नवी विभाति। त्वं पशअय। केव? क्वचित्प्रदेशे प्रभया लिम्पन्ती संनिहितमिति प्रभालेपिभिरिन्द्रनीलैरनुविद्धा सह गुम्फिता मुक्तामयी यष्टिरिव हारावलिरिव विभाति। अन्यत्र प्रदेश इन्दीवरैर्नीलोत्पलैरुत्खचितान्तरा सह ग्रथिता सितपङ्कजानां पुण्डरीकाणां मालेव। विभातीति सर्वत्र संबन्धः। क्वचित्कादम्बसंसर्गवती नीलहंससंसृष्टा प्रियं मानसं नाम सरो येषां खगानां राजहंसानां पङ्क्तिरिव।
राजहंसास्तु ते चञ्चुचरणैर्लोहितैः सिताः इत्यमरः (अमरकोशः २.५.२६ ) । अन्यत्र कालागुरुणा दत्त पत्रा रचितमकरिकापत्रा भुवश्चन्दनकल्पिता भक्तिरिव। क्वचिच्छायासु विलीनैः स्थितैस्तमोभिः शबलीकृता कर्बुरीकृता चान्द्रमसी प्रभा चन्द्रिकेव। अन्यत्र रन्ध्रेष्वालक्ष्यनभःप्रदेशा शुभ्रा शरदभ्रलेखा शरन्मेघपङ्क्तिरिव। क्वचित्कृष्णोरगभूषणा भस्माङ्गरागेश्वरस्य तनुरिव विभाति। शेषो व्याख्यातः। कलापकम् ॥
Summary
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Somewhere, the Ganga appears like a string of pearls interspersed with lustrous sapphires. Elsewhere, it looks like a garland of white lotuses with blue lotuses studded in between.
सारांश
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कहीं नीलम की आभा वाली मोतियों की माला जैसी, तो कहीं नीले कमलों से गुथी श्वेत कमलों की माला जैसी गंगा-यमुना की धारा शोभा पा रही है।
पदच्छेदः
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| क्वचित् | क्वचित् | somewhere |
| प्रभालेपिभिः | प्रभालेपिन् (३.३) | with lustrous |
| इन्द्रनीलैः | इन्द्रनील (३.३) | with sapphires |
| मुक्तामयी | मुक्तामय (१.१) | made of pearls |
| यष्टिः | यष्टि (१.१) | a string |
| इव | इव | like |
| अनुविद्धा | अनुविद्ध (अनु√व्यध्+क्त, १.१) | interspersed |
| अन्यत्र | अन्यत्र | elsewhere |
| माला | माला (१.१) | a garland |
| सितपङ्कजानाम् | सित–पङ्कज (६.३) | of white lotuses |
| इन्दीवरैः | इन्दीवर (३.३) | with blue lotuses |
| उत्खचितान्तरेव | उत्खचित–अन्तर (१.१)–इव | like one with its intervals studded |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क्व | चि | त्प्र | भा | ले | पि | भि | रि | न्द्र | नी | लै |
| र्मु | क्ता | म | यी | य | ष्टि | रि | वा | नु | वि | द्धा |
| अ | न्य | त्र | मा | ला | सि | त | प | ङ्क | जा | ना |
| मि | न्दी | व | रै | रु | त्ख | चि | ता | न्त | रे | व |
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