नाभिप्ररूढाम्बुरुहासनेन
संस्तूयमानः प्रथमेन धात्रा ।
अमुं युगान्तोचितयोगनिद्रः
संहृत्य लोकान्पुरुषोऽधिशेते ॥
नाभिप्ररूढाम्बुरुहासनेन
संस्तूयमानः प्रथमेन धात्रा ।
अमुं युगान्तोचितयोगनिद्रः
संहृत्य लोकान्पुरुषोऽधिशेते ॥
संस्तूयमानः प्रथमेन धात्रा ।
अमुं युगान्तोचितयोगनिद्रः
संहृत्य लोकान्पुरुषोऽधिशेते ॥
अन्वयः
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युगान्त-उचित-योग-निद्रः पुरुषः लोकान् संहृत्य, नाभि-प्ररूढ-अम्बुरुह-आसनेन प्रथमेन धात्रा संस्तूयमानः (सन्) अमुम् अधिशेते ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
नाभीति॥ युगान्ते कल्पान्त उचिता परिचिता योगाः स्वात्मनिष्ठैव निद्रेव निद्रा यस्य स पुरुषो विष्णुर्लोकान्संहृत्य। नाभ्यां प्ररूढं यदम्बुरुहं पद्मं तदासनेन तन्नाभिकमलाश्रयेण प्रथमेन धात्रा दक्षादीनामपि स्रष्ट्रा पितामहेन संस्तूयमानः सन्। अमुमधिशेते। अमुष्मिञ्धेत इत्यर्थः। कल्पान्तेऽप्यस्तीति भावः ॥
Summary
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"The Supreme Being, Vishnu, in his yogic sleep at the end of an eon, having withdrawn all the worlds into himself, lies upon this very ocean, praised by the first creator, Brahma, who is seated on the lotus that sprouts from His navel."
सारांश
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प्रलय काल में लोकों का संहार कर आदि पुरुष विष्णु इसी समुद्र में योगनिद्रा में लीन होते हैं, जहाँ ब्रह्मा उनकी नाभि-कमल पर बैठकर स्तुति करते हैं।
पदच्छेदः
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| नाभि-प्ररूढ-अम्बुरुह-आसनेन | नाभि–प्ररूढ–अम्बुरुह–आसन (३.१) | by him whose seat is the lotus grown from his navel |
| संस्तूयमानः | संस्तूयमान (सम्√स्तु+शानच्, १.१) | being praised |
| प्रथमेन | प्रथम (३.१) | by the first |
| धात्रा | धातृ (३.१) | by the creator (Brahma) |
| अमुम् | अदस् (२.१) | this (ocean) |
| युगान्त-उचित-योग-निद्रः | युगान्त–उचित–योगनिद्रा (१.१) | He who is in yogic sleep suitable for the end of an eon |
| संहृत्य | संहृत्य (सम्√हृ+ल्यप्) | having withdrawn |
| लोकान् | लोक (२.३) | the worlds |
| पुरुषः | पुरुष (१.१) | the Supreme Being (Vishnu) |
| अधिशेते | अधिशेते (अधि√शी कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | lies upon |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ना | भि | प्र | रू | ढा | म्बु | रु | हा | स | ने | न |
| सं | स्तू | य | मा | नः | प्र | थ | मे | न | धा | त्रा |
| अ | मुं | यु | गा | न्तो | चि | त | यो | ग | नि | द्रः |
| सं | हृ | त्य | लो | का | न्पु | रु | षो | ऽधि | शे | ते |
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