तां देवतापित्रतिथिक्रियार्था-
मन्वग्ययौ मध्यमलोकपालः ।
बभौ च सा मतेन सतां तेन
श्रद्धेव साक्षाद्विधिनोपपन्ना ॥
तां देवतापित्रतिथिक्रियार्था-
मन्वग्ययौ मध्यमलोकपालः ।
बभौ च सा मतेन सतां तेन
श्रद्धेव साक्षाद्विधिनोपपन्ना ॥
मन्वग्ययौ मध्यमलोकपालः ।
बभौ च सा मतेन सतां तेन
श्रद्धेव साक्षाद्विधिनोपपन्ना ॥
अन्वयः
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मध्यमलोकपालः देवतापितृअतिथिक्रियार्थाम् ताम् अन्वक् ययौ। सा च तेन सताम् मतेन (अन्वीयमाना) साक्षात् विधिना उपपन्ना श्रद्धा इव बभौ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तामिति॥ मध्यमलोकपालो भूपालः। देवतापित्रतिथीनां क्रिया यागश्राद्धदानानि ता एवार्थः प्रयोजनं यस्यास्तां तां धेनुमन्वगनुपदं ययौ।
अन्वगन्वक्षमनुगेऽनुपदं क्लीबमव्ययम् इत्यमरः (अमरकोशः ३.१.७७ ) । सतां मतेन सिद्धिर्मान्येन। गतिबुद्धि- (अष्टाध्यायी १.४.५२ ) इत्यादिना वर्तमाने क्तः। क्तस्य च वर्तमाने (अष्टाध्यायी २.३.६७ ) इति षष्ठी। तेन राज्ञोपपन्ना युक्ता सा धेनुः। सतां मतेन विधिनाऽनुष्ठानेनोपपन्ना युक्ता साक्षात् प्रत्यक्षा श्रद्धाऽऽस्तिक्यबुद्धिरिव। बभौ च ॥
Summary
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The protector of the middle world (King Dilipa) followed her, who was essential for rites concerning gods, ancestors, and guests. Followed by him, who was esteemed by the virtuous, she shone like Faith personified, accompanied by its corresponding Ritual.
सारांश
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देवताओं, पितरों और अतिथियों के यज्ञ-कार्यों के निमित्त उस गाय के पीछे चलते हुए पृथ्वीपाल राजा दिलीप वैसे ही सुशोभित हुए, जैसे शास्त्रोक्त विधि से युक्त श्रद्धा सुशोभित होती है।
पदच्छेदः
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| ताम् | तद् (२.१) | her |
| देवतापितृअतिथिक्रियार्थाम् | देवता–पितृ–अतिथि–क्रिया–अर्थ (२.१) | who was for the purpose of rites for gods, ancestors, and guests |
| अन्वक् | अन्वञ्च् | following |
| ययौ | ययौ (√या कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | went |
| मध्यमलोकपालः | मध्यम–लोक–पाल (१.१) | the protector of the middle world |
| बभौ | बभौ (√भा कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | shone |
| च | च | and |
| सा | तद् (१.१) | she |
| मतेन | मति (३.१) | esteemed by |
| सताम् | सत् (६.३) | of the virtuous |
| तेन | तद् (३.१) | by him |
| श्रद्धा | श्रद्धा (१.१) | Faith |
| इव | इव | like |
| साक्षात् | साक्षात् | personified |
| विधिना | विधि (३.१) | by Ritual |
| उपपन्ना | उपपन्न (उप√पद्+क्त+टाप्, १.१) | accompanied |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तां | दे | व | ता | पि | त्र | ति | थि | क्रि | या | र्था |
| म | न्व | ग्य | यौ | म | ध्य | म | लो | क | पा | लः |
| ब | भौ | च | सा | म | ते | न | स | तां | ते | न |
| श्र | द्धे | व | सा | क्षा | द्वि | धि | नो | प | प | न्ना |
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