स पल्वलोत्तीर्णवराहयूथा-
न्यावासवृक्षोन्मुखबर्हिणानि ।
ययौ मृगाध्यासितशाद्वलानि
श्यामायमानानि वनानि पश्यन् ॥
स पल्वलोत्तीर्णवराहयूथा-
न्यावासवृक्षोन्मुखबर्हिणानि ।
ययौ मृगाध्यासितशाद्वलानि
श्यामायमानानि वनानि पश्यन् ॥
न्यावासवृक्षोन्मुखबर्हिणानि ।
ययौ मृगाध्यासितशाद्वलानि
श्यामायमानानि वनानि पश्यन् ॥
अन्वयः
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सः पल्वलोत्तीर्णवराहयूथानि आवासवृक्षोन्मुखबर्हिणानि मृगाध्यासितशाद्वलानि श्यामायमानानि वनानि पश्यन् ययौ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
स इति॥ स राजा। पल्वलेभ्योऽल्पजलाशयभ्य उत्तीर्णानि निर्गतानि वराहाणां यूथानि कुलानि येषु तानि। बर्हाण्येषां सन्तीति बर्हिणा मयूराः।
मयूरो बर्हिणो बर्ही इत्यमरः (अमरकोशः २.५.३२ ) । फलबर्हाभ्यामिनच्प्रत्ययो वक्तव्यः। आवासवृक्षा णामुन्मुखा बर्हिणा येषु तानि श्यामायमानानि वराहबर्हिणादिमलिनिम्ना श्यामानि। श्यामानि भवन्तीति श्यामायमानानि। लोहितादिडाज्भ्यः क्यष् (अष्टाध्यायी ३.१.१३ ) इति क्यष्प्रत्ययः। वा क्यषः (अष्टाध्यायी १.३.९० ) इत्यात्मनेपदे शानच्। मृगैरध्यासिता अधिष्ठिताः शाद्वला येषु तानि। शादाः शष्पाण्येषु देशेषु सन्तीति शाद्वलाः शष्पश्यामदेशाः। शाद्वलः शादहरिते इत्यमरः (अमरकोशः २.१.११ ) । शादः कर्दमशष्पयोः इति विश्वः। नडशादादूङ्वलच् (अष्टाध्यायी ४.२.८८ ) इति ड्वलच्प्रत्ययः। वनानि पश्यन्ययौ ॥
Summary
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He proceeded, observing the forests that were growing dark. In them, herds of boars were emerging from ponds, peacocks were heading towards their roosting trees, and green patches were occupied by deer.
सारांश
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राजा ने कीचड़ से बाहर निकलते सुअरों के झुंड, पेड़ों पर बसेरे के लिए उत्सुक मोरों और घास पर बैठे हिरणों से युक्त, अंधकारमय होते हुए वन को देखते हुए मार्ग तय किया।
पदच्छेदः
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| सः | तद् (१.१) | He |
| पल्वलोत्तीर्णवराहयूथानि | पल्वल–उत्तीर्ण–वराह–यूथ (२.३) | in which herds of boars were emerging from ponds |
| आवासवृक्षोन्मुखबर्हिणानि | आवास–वृक्ष–उन्मुख–बर्हिण (२.३) | in which peacocks were heading towards their roosting trees |
| ययौ | ययौ (√या कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | proceeded |
| मृगाध्यासितशाद्वलानि | मृग–अध्यासित–शाद्वल (२.३) | whose green patches were occupied by deer |
| श्यामायमानानि | श्यामायमान (√श्याम+क्यङ्+शानच्, २.३) | growing dark |
| वनानि | वन (२.३) | the forests |
| पश्यन् | पश्यत् (√दृश्+शतृ, १.१) | seeing |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | प | ल्व | लो | त्ती | र्ण | व | रा | ह | यू | था |
| न्या | वा | स | वृ | क्षो | न्मु | ख | ब | र्हि | णा | नि |
| य | यौ | मृ | गा | ध्या | सि | त | शा | द्व | ला | नि |
| श्या | मा | य | मा | ना | नि | व | ना | नि | प | श्यन् |
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