तस्याः खुरन्यासपवित्रपांसु-
मपांसुलानां धुरि कीर्तनीया ।
मार्गं मनुष्येश्वरधर्मपत्नी
श्रुतेरिवार्थं स्मृतिरन्वगच्छत् ॥
तस्याः खुरन्यासपवित्रपांसु-
मपांसुलानां धुरि कीर्तनीया ।
मार्गं मनुष्येश्वरधर्मपत्नी
श्रुतेरिवार्थं स्मृतिरन्वगच्छत् ॥
मपांसुलानां धुरि कीर्तनीया ।
मार्गं मनुष्येश्वरधर्मपत्नी
श्रुतेरिवार्थं स्मृतिरन्वगच्छत् ॥
अन्वयः
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अपांसुलानाम् धुरि कीर्तनीया मनुष्येश्वरधर्मपत्नी श्रुतेः अर्थम् स्मृतिः इव तस्याः खुरन्यासपवित्रपांसुम् मार्गम् अन्वगच्छत्।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तस्या इति॥ पांसवो दोषा आसां सन्तीति पांसुलाः स्वैरिण्यः।
स्वैरिणी पांसुला इत्यमरः (अमरकोशः २.६.११ ) । सिध्मादिभ्यश्च (अष्टाध्यायी ५.२.९७ ) इति लच्प्रत्ययः। अपांसुलानां पतिव्रतानां धुर्यग्रे कीर्तनीया परिगणनीया मनुष्येश्वरधर्मपत्नी। खुरन्यासैः पवित्राः पांसवो यस्य तम्। रेणुर्द्वयोः स्त्रियां धूलिः पांसुर्ना न द्वयो रजः इत्यमरः (अमरकोशः २.८.९८ ) । तस्या धेनोर्मार्गम्। स्मृतिर्मन्वादिवाक्यं श्रुतेर्वेदवाक्यस्यार्थमभिधेयमिव। अन्वगच्छदनुसृतवती च। यथा स्मृतिः श्रुतिक्षुण्णमेवार्थमनुसरति तथा सापि गोखुरक्षुण्णमेव मार्गमनुससारेत्यर्थः। धर्मपत्नीत्यत्राश्वघासादिवत्तादर्थ्ये षष्ठीसमासः, प्रकृतिविकाराभावात्। पांसुलपथप्रवृत्तावप्यपांसुलानामिति विरोधालंकारो ध्वन्यते॥
Summary
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Queen Sudakṣiṇā, the most virtuous of women, followed the cow's path, which was sanctified by the dust of her hooves. Her following the cow is compared to the Smṛti scriptures following and expanding upon the inherent meaning of the Vedas.
सारांश
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पतिव्रता स्त्रियों में श्रेष्ठ रानी सुदक्षिणा ने उस गाय के खुरों से पवित्र हुई धूल वाले मार्ग का उसी प्रकार अनुसरण किया, जैसे स्मृतियाँ वेदों (श्रुति) के अर्थ का अनुसरण करती हैं।
पदच्छेदः
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| तस्याः | तद् (६.१) | her (the cow's) |
| खुरन्यासपवित्रपांसुम् | खुर–न्यास (नि√अस्+घञ्)–पवित्र–पांसु (२.१) | the path whose dust was purified by the touch of her hooves |
| अपांसुलानाम् | पांसु (+लच, ६.३) | of the virtuous women |
| धुरि | धुर् (७.१) | at the head |
| कीर्तनीया | कीर्तनीय (√कीर्त्+अनीयर्, १.१) | praiseworthy |
| मार्गम् | मार्ग (२.१) | the path |
| मनुष्येश्वरधर्मपत्नी | मनुष्य–ईश्वर–धर्म–पत्नी (१.१) | the lawful wife of the lord of men |
| श्रुतेः | श्रुति (√श्रु+क्तिन्, ६.१) | of the Vedas |
| इव | इव | like |
| अर्थम् | अर्थ (२.१) | the meaning |
| स्मृतिः | स्मृति (√स्मृ+क्तिन्, १.१) | the Smṛti scripture |
| अन्वगच्छत् | अन्वगच्छत् (अनु√गम् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | followed |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | स्याः | खु | र | न्या | स | प | वि | त्र | पां | सु |
| म | पां | सु | ला | नां | धु | रि | की | र्त | नी | या |
| मा | र्गं | म | नु | ष्ये | श्व | र | ध | र्म | प | त्नी |
| श्रु | ते | रि | वा | र्थं | स्मृ | ति | र | न्व | ग | च्छत् |
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