निवर्त्य राजा दयितां दयालु-
स्तां सौरभेयीं सुरभिर्यशोभिः ।
पयोधरीभूतचतुःसमुद्रां
जुगोप गोरूपधरामिवोर्वीम् ॥
निवर्त्य राजा दयितां दयालु-
स्तां सौरभेयीं सुरभिर्यशोभिः ।
पयोधरीभूतचतुःसमुद्रां
जुगोप गोरूपधरामिवोर्वीम् ॥
स्तां सौरभेयीं सुरभिर्यशोभिः ।
पयोधरीभूतचतुःसमुद्रां
जुगोप गोरूपधरामिवोर्वीम् ॥
अन्वयः
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यशोभिः सुरभिः दयालुः राजा दयिताम् निवर्त्य पयोधरीभूतचतुःसमुद्राम् गोरूपधराम् उर्वीम् इव ताम् सौरभेयीम् जुगोप।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
निवर्त्येति॥ दयालुः कारुणिकः।
स्याद्दयालुः कारुणिकः इत्यमरः (अमरकोशः ३.१.१५ ) । स्पृहिगृहि- (अष्टाध्यायी ३.२.१५८ ) इत्यादिनालुच्प्रत्ययः। यशोभिः सुरभिर्मनोज्ञः। सुरभिः स्यान्मनोज्ञेऽपि इति विश्वः। स राजा तां दयितां निवर्त्य सौरभेयीं कामधेनुसुतां नन्दिनीम्। धरन्तीति धराः। पचाद्यच्। पयसां धराः पयोधराः स्तनाः। स्त्रीस्तनाब्दौ पयोधरौ इत्यमरः (अमरकोशः ३.३.१७२ ) । अपयोधराः पयोधराः संपद्यमानाः पयोधरीभूताः। अभूततद्भावे च्विः। कुगतिप्रादयः (अष्टाध्यायी २.२.१८ ) इति समासः। पयोधरीभूताश्चत्वारः समुद्रा यस्यास्ताम्। अनेकमन्यपदार्थे (अष्टाध्यायी २.२.२४ ) इत्यनेकपदार्थग्रहणसामर्थ्यात्त्रिपदो बहुव्रीहिः। गोरूपधरामुर्वीमिव। जुगोप ररक्ष। भूरक्षणप्रयत्नेनेव ररक्षेति भावः। धेनुपक्षे, -पयसा दुग्धेनाधरीभूताश्चत्वारः समुद्रा यस्याः सा तथोक्ता ताम्। दुग्धतिरस्कृतसागरामित्यर्थः॥
Summary
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After sending his wife back to the hermitage, the compassionate King Dilīpa, famous for his virtues, began guarding Nandinī. He protected her as if she were the Earth itself, which had taken the form of a cow and possessed the four oceans as her udders.
सारांश
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यशस्वी राजा दिलीप ने अपनी प्रिय पत्नी को वापस लौटाकर, चार समुद्रों के समान दूध देने वाले थनों वाली उस गाय की इस प्रकार रक्षा की जैसे वह पृथ्वी ही गाय का रूप धारण कर आई हो।
पदच्छेदः
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| निवर्त्य | निवर्त्य (नि√वृत्+ल्यप्) | having sent back |
| राजा | राजन् (१.१) | the king |
| दयिताम् | दयिता (√दय्+क्त, २.१) | his beloved wife |
| दयालुः | दया (+आलु, १.१) | compassionate |
| ताम् | तद् (२.१) | her |
| सौरभेयीम् | सुरभि (२.१) | the daughter of Surabhi (Nandini) |
| सुरभिः | सुरभि (१.१) | fragrant |
| यशोभिः | यशस् (३.३) | with fame |
| पयोधरीभूतचतुःसमुद्राम् | पयस्–पयोधर (√धृ+अच्)–भूत (√भू+क्त)–चतुर्–समुद्र (२.१) | whose four oceans have become udders |
| जुगोप | जुगोप (√गुप् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | protected |
| गोरूपधराम् | गो–रूप–धरा (√धृ+अच्, २.१) | bearing the form of a cow |
| इव | इव | as if |
| उर्वीम् | उर्वी (२.१) | the earth |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | व | र्त्य | रा | जा | द | यि | तां | द | या | लु |
| स्तां | सौ | र | भे | यीं | सु | र | भि | र्य | शो | भिः |
| प | यो | ध | री | भू | त | च | तुः | स | मु | द्रां |
| जु | गो | प | गो | रू | प | ध | रा | मि | वो | र्वीम् |
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